शुक्रवार, 07 जुलाई, 2006 को 17:54 GMT तक के समाचार
सुनील रामन
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
यह कोई आम संवाददाता सम्मेलन नहीं था. तभी तो पत्रकार वार्ता के पूर्व निर्धारित समय से एक घंटा पहले से ही मीडिया के लोग दिल्ली के एक पाँच सितारा होटल में जमा होने लगे थे.
क़रीब 15 टीवी चैनलों के कैमरे तैनात खड़े थे. सब एक ही व्यक्ति के इंतज़ार में, जिसने पिछले दिनों विश्व के स्टील उद्योग के साथ-साथ भारतीय स्टील मालिकों में भी हड़कंप मचा दिया था. जी हाँ, यह शख़्स है दुनिया का तीसरा सबसे अमीर आदमी- लक्ष्मी निवास मित्तल.
और फिर जैसे ही लक्ष्मी मित्तल अपने बेटे आदित्य मित्तल के साथ गाड़ियों के काफ़िले में इस होटल के अंदर पहुँचे, फ़ोटोग्राफ़रों की फौज ने उन्हें घेर लिया.
इस संवाददाता सम्मेलन को ओएनजीसी यानी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन ने आयोजित किया था. इस भारतीय कंपनी के साथ मित्तल स्टील ने पिछले वर्ष एक कंपनी स्थापित की थी.
पर कौन सुनना चाहता था सरकारी अफ़सरों के भाषणों को. लक्ष्मी मित्तल का मुस्कुराता हुआ चेहरा यह सच्चाई बयान कर रहा था.
ओएनजीसी के अध्यक्ष और पैट्रोलियम सचिव ने भाषण दिए जिसमें उन्होंने मित्तल की तारीफ़ में क़सीदे पढ़े.
कशीदे
पैट्रोलियम सचिव ने तो यहाँ तक कह डाला कि यह संवाददाता सम्मेलन उनकी बातें सुनने के लिए नहीं बल्कि आर्सेलर को ख़रीदने के बाद मित्तल स्टील के अध्यक्ष, लक्ष्मी मित्तल की कहानी सुनने के लिए बुलाया गया.
लक्ष्मी मित्तल के साथ उनके बेटे और मित्तल स्टील के उपाध्यक्ष आदित्य मित्तल भी मंच पर बैठे थे.
एक ओर जहाँ लक्ष्मी मित्तल की तारीफ़ हुई वहीं आदित्य की दूरदर्शिता को सराहा गया.
ओएनजीसी के अध्यक्ष ने तो यह तक कह डाला कि मित्तल-आर्सेलर के अनुबंध की ख़बर सुनते ही हर भारतीय का सीना चौड़ा हो गया था.
जिस तरह से लक्ष्मी मित्तल का स्वागत हुआ, उनकी तारीफ़ की गई, उनकी विशेषताएँ गिनाई गईं उन्हें सुनकर ऐसा लग रहा था कि मानो मंच पर बैठा शख़्स भारत की मिट्टी से निकला हुआ कोई भारतीय नहीं बल्कि कोई राष्ट्राध्यक्ष है या फिर दुनिया फ़तह करके लौटा हमारा सिकंदर.