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बुधवार, 05 जुलाई, 2006 को 21:10 GMT तक के समाचार

चार दशकों बाद नाथू ला दर्रे से व्यापार

चार दशकों बाद नाथू ला दर्रे से भारत और चीन के बीच व्यापार शुरु होने जा रहा है.

नाथू ला दर्रा 1962 में भारत चीन युद्ध के बाद से बंद है और अब समझौते के तहत इसे छह जुलाई से व्यापार के लिए खोला जाएगा.

लगभग 43 हज़ार मीटर की ऊंचाई पर स्थित नाथू ला सिक्किम और तिब्बत को जोड़ता है.

इस दर्रे के खुलने से भारत और चीन के पहाड़ी इलाक़ों को व्यापार के ज़रिए काफ़ी फायदा होने की उम्मीद है.

अध्ययनों के अनुसार नाथू ला से 2010 तक 7 करोड़ 50 लाख डॉलर तक के कारोबार की उम्मीद की जा रही है. हालांकि भारत और चीन के बीच होनेवाले व्यापार के लिहाज से यह बहुत छोटी राशि है.

नाथू ला में तैनात रहे पूर्व सैन्य अधिकारी केके गांगुली का मानना है कि नाथू ला कभी भी व्यापार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण केंद्र नहीं रहा.

उनका कहना था कि दर्रे पर आठ महीने बर्फ जमी रहती है इसलिए केवल गर्मियों में ही कारोबार संभव हो पाता है.

अहमियत

प्रेक्षकों का कहना है कि नाथू ला से व्यापार की शुरुआत कूटनीतिक दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.

भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने इन विवादों को सुलझाने की दिशा में प्रगति की है.

कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जयंतअनुज बंदोपाध्याय मानते हैं कि नाथू ला से व्यापार करने की सहमति देकर चीन ने सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया है. जबकि इसके पहले वह इससे इनकार करता आया था.

समझौते के तहत दोनों देश उन 30 वस्तुओं का व्यापार कर सकेंगे जिस पर 1991, 92 और 2003 में सहमति हुई थी.

इन वस्तुओं में कृषि उत्पाद, कंबल, सूखे फल, कॉफी और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ शामिल हैं.

बीसवीं सदी की शुरुआत में भारत और चीन के होनेवाले व्यापार का 80 प्रतिशत हिस्सा नाथू ला दर्रे के ज़रिए ही होता था. यह दर्रा प्राचीन सिल्क रुट का भी हिस्सा रहा है.