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मंगलवार, 04 जुलाई, 2006 को 11:35 GMT तक के समाचार

'विद्रोहियों से किसी भी मुद्दे पर बातचीत'

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है और कहा है कि वे 'जिस विषय पर चाहें' बात कर सकते हैं.

उन्होंने एक निजी भारतीय टीवी चैनेल से कहा कि वे विद्रोहियों के सामने शांति के लिए एक 'रूपरेखा' रखना चाहते हैं.

राष्ट्रपति का कहना था, मैं उनसे यह नहीं कहना चाहता कि यह आपको स्वीकार करना ही होगा.

श्रीलंका में पिछले कुछ महीनों में हिंसा में बढ़ौतरी हुई है जिसमें लगभग 700 लोगों की जानें जा चुकी हैं.

राजपक्षे का कहना था कि उन्होंने समाज के सभी वर्गों से विशेषज्ञों को शांति के लिए एक रूपरेखा तैयार करने का काम सौंपा है.

उन्होंने कहा, हम लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम के सदस्यों से कह सकते हैं कि वे बैठ कर एक ख़ाका बनाएँ और तय करें कि वे क्या चहते हैं.

उन्होंने कहा, हम सब इंसान हैं. वे भी (विद्रोही) श्रीलंकाई हैं. वह चाहे प्रभाकरण हो या महिंदा राजपक्षे, हम दोनों श्रीलंका के हैं और बैठ कर बातचीत कर सकते हैं.

उनका कहना था कि वह विद्रोहियों पर किसी समझौते को स्वीकार करने का दबाव नहीं डालना चाहते.

उन्होंने तमिल विद्रोहियों के इस आरोप से इंकार किया कि अलग हुए तमिल टाइगर कमांडर कर्नल करुणा की सेनाएँ सरकार की मदद से उन पर हमले कर रही हैं.

राजपक्षे ने कहा कि सरकार किसी को उन इलाक़ों में अपना अभियान संचालित करने की अनुमति नहीं दे रही है.