मंगलवार, 04 जुलाई, 2006 को 18:02 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र के किसान नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विदर्भ दौरे और पैकेज की घोषणा के बाद कर्ज़ में फंसे सात और किसानों ने आत्महत्या कर ली है.
ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को इस क्षेत्र का दौरा किया था विदर्भ क्षेत्र के बदहाल किसानों को राहत देते हुए 37 अरब 50 करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा की थी.
इस पैकेज के तहत घोषित राशि में से 21 अरब 77 करोड़ रूपए की राशि कृषि परियोजनाओं पर ख़र्च की जाएगी और किसानों का 7 अरब 12 करोड़ रूपए का कर्ज़ माफ़ कर दिया जाएगा.
पिछले पाँच वर्षों के दौरान अच्छी फसल न होने के कारण कर्ज़ में फंसे लगभग 1600 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.
पिछले साल जून से अब तक विदर्भ के लगभग 600 किसानों ने आत्महत्या की है.
'पैकेज पर्याप्त नहीं'
विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ब्याज माफ़ करने से काम नहीं चलेगा, कर्ज़ माफ़ किया जाना चाहिए.
उनका कहना था कि इस क्षेत्र में कपास की पैदावार पर किसान लगभग चार हज़ार करोड़ का कर्ज़ लेते हैं जिसमें से बैंकों से केवल 600 करोड़ रुपए ही मिल पाते हैं बाक़ी के 3600 करोड़ रुपए किसान साहूकारों से अधिक ब्याज पर कर्ज़ लेता है.
वो प्रधानमंत्री के पैकेज से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना था कि सरकार कपास की ख़रीदारी कम कर रही है और इसकी कीमतें गिरी हैं, प्रधानमंत्री के पैकेज में इन बातों का उल्लेख नहीं है.
ऐसा नहीं है कि केवल विदर्भ का किसान परेशान है, पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी तीन हज़ार से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं.
अब दक्षिणी राज्य केरल और उत्तरी राज्य पंजाब से भी किसानों के आत्महत्या करने की ख़बरें आ रही हैं.
इन घटनाओं के बाद विशेषज्ञ सरकार की कृषि नीति पर सवाल उठा रहे हैं.