बुधवार, 05 जुलाई, 2006 को 11:52 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
मुस्लिम समुदाय ने अयोध्या के विवादित परिसर में बने अस्थाई राममंदिर की सुरक्षा के लिए वातानुकूलित बुलेट प्रूफ इस्पात कक्ष बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है.
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ज़फ़रयाब जिलानी का कहना है कि ऐसा निर्माण वहाँ बाबरी मस्जिद को तोड़कर बनाए मंदिर को पुख्ता कर देगा.
जिलानी ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह को तीन अप्रैल को पत्र लिखा था और उसमें उन्होंने इस प्रस्तावित सुरक्षा घेरे पर आपत्ति जताई थी.
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.
इधर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्तावित सुरक्षा घेरे के लिए 7 करोड़ 22 लाख रुपए की राशि मंजूर कर दी है.
साथ ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रार्थनापत्र देकर वहाँ पर प्रस्तावित निर्माण कार्य की अनुमति देने का अनुरोध किया है.
परिसर को ख़तरा
इस प्रार्थनापत्र में कहा गया है कि पाँच जुलाई 2005 को अयोध्या में विवादित परिसर में जो हमला हुआ था, उसके बाद ख़ुफ़िया एजेंसियों ने परिसर को ख़तरा क़ायम रहने की रिपोर्ट दी है.
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में अपने फ़ैसले में केंद्र सरकार के विवादित परिसर के अधिग्रहण को विधिसम्मत ठहराते हुए विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे.
इसी के तहत 2002 में विहिप को शिलापूजन की अनुमति नहीं मिली थी.
जिलानी का कहना था कि यह निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप भी नहीं है.
प्रस्तावित निर्माण कार्य में 10 बुलेट प्रूफ वाच टॉवर और अन्य कार्य प्रस्तावित हैं.
ख़ुफ़िया एजेंसियों का मानना है कि परिसर पर ग्रेनेड या फिर मिसाइल से हमला हो सकता है.