एलआर जगदीशन
बीबीसी संवाददाता, चेन्नई से
केंद्र सरकार के विनिवेश के फ़ैसले के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख खनन और बिजली उत्पादन करनेवाली कंपनी नाइवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन के लगभग 20 हज़ार कर्मचारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.
कर्मचारी यूनियनों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मुख्यमंत्री करुणानिधि के निगम के विनिवेश के दौरान कर्मचारियों को हिस्सेदारी प्राथमिकता के आधार पर दिए जाने की पेशकश ठुकरा दी है.
अधिकांश राजनीतिक दल और श्रम संगठन उनकी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं.
नाइवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन खनन के अलावा 2500 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी करता है और इससे दक्षिण के चार राज्यों तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केंद्रशासित प्रदेश पांडिचेरी को बिजली आपूर्ति की जाती है.
प्रेक्षकों का कहना है कि विद्युत उत्पादन में बाधा से पूरे दक्षिण भारत की बिजली की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है.
पेशकश ठुकराई
वामपंथी श्रम संगठन सीटू के उपमहासचिव टीके रंगराजन ने बीबीसी से बातचीत में कहा,'' ट्रेड यूनियनें करुणानिधि के सुझाव और मनमोहन सिंह के आश्वासन दोनों को ठुकराती हैं और हम अपनी घोषणा के अनुसार चार जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं.''
उनका कहना था कि कर्मचारियों को शेयर देने की पेशकश निजीकरण का परोक्ष रास्ता है.
ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नाइवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन कंपनी की दस फ़ीसदी हिस्सेदारी का विनिवेश करना का फ़ैसला किया था.
इस पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने केंद्र सरकार से अपने फ़ैसले पर फिर विचार करने के लिए कहा था.
एम करुणानिधि ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी एक चिट्ठी में कहा था कि नाइवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन में विनिवेश करने का प्रस्ताव न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अनुरूप नहीं है.
यूपीए सरकार की सहयोगी वामपंथी पार्टियाँ भी सरकार की कई आर्थिक नीतियों का विरोध करती रही हैं.