http://www.bbcchindi.com

रविवार, 02 जुलाई, 2006 को 10:26 GMT तक के समाचार

'अमरीकी राजदूत शांति नहीं चाहते'

नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड ने कहा है कि उनके देश में अमरीका के राजदूत नेपाल में शांति नहीं चाहते और सरकार और माओवादियों के बीच शंका का माहौल पैदा कर रहे हैं.

अमरीकी राजदूत जेम्स मोरीआर्टी ने नेपाल सरकार में माओवादियों के शामिल होने के बारे में बयान दिया था.

उन्होंने कहा था कि अगर विद्रोही बिना हथियार डाले सरकार में शामिल हुए तो अमरीका नेपाल को दी जाने वाली मदद काट देगा.

जेम्स मोरीआर्टी ने एक बार फिर कहा कि अमरीका अभी भी माओवादियों को चरमपंथी मानता है भले ही वे सरकार के साथ संघर्षविराम की घोषणा कर चुके हैं.

अमरीकी राजदूत का कहना था कि अमरीकी का़नून के तहत चरमपंथी संगठनों को मदद देने की मनाही है.

आर्थिक मदद

बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हावीलैंड का कहना है कि अमरीकी राजदूत के बयान से मतलब निकाला जा सकता है कि अगर माओवादी नेपाल सरकार में शामिल होते हैं तो नेपाल को दी जाने वाली आर्थिक मदद अमरीका को काटनी पड़ेगी.

अमरीका हर साल चार करोड़ पचास लाख डॉलर नेपाल को देता है.

नेपाल सरकार और माओवादियों के बीच हुए समझौते के तहत नेपाल की अस्थाई सरकार में विद्रोहियों को शामिल किया जाएगा.

अमरीका और संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मौजूदा संघर्षविराम के दौरान ही माओवादी कई लोगों को मार चुके हैं.

माओवादियों ने सिर्फ़ एक व्यक्ति के मारे जाने की बात स्वीकार की है और कहा है कि दोषी को सज़ा दी जाएगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि माओवादी अब इस बात से पीछे हटते नज़र आ रहे हैं कि वहाँ चुनाव से पहले दोनों पक्षों के हथियारों पर संयुक्त राष्ट्र नज़र रखेगा.

अब माओवादी कह रहे हैं कि नेपाली ये काम ख़ुद कर सकते हैं.

नेपाल सरकार ने अनिश्चित काल के लिए संघर्षविराम की घोषणा कर दी है लेकिन माओवादियों ने ये नहीं कहा है कि संघर्षविराम जुलाई के बाद भी जारी रहेगा.