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रविवार, 02 जुलाई, 2006 को 18:57 GMT तक के समाचार

'मुशर्रफ़ 31 जुलाई तक सत्ता छोड़ दें'

पाकिस्तान के निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो ने मुशर्रफ़ सरकार से 31 जुलाई तक सत्ता छोड़ने को कहा है.

साथ ही चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सरकार के ख़िलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा.

पाकिस्तान के दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों की विपक्षी दलों के गठबंधन 'एलायंस फ़ॉर रेस्टोरेशन ऑफ़ डेमोक्रेसी' यानी एआरडी नेताओं के साथ लंदन में मुलाक़ात के बाद यह फ़ैसला लिया गया.

दोनों नेताओं की यह तीसरी मुलाक़ात थी. इन नेताओं ने एक प्रस्ताव भी पारित किया जिसमें मुशर्रफ़ सरकार से सत्ता छोड़ने की बात कही गई है.

बीबीसी संवाददाता का कहना था कि दोनों नेताओं ने घोषणा की है कि वे पाकिस्तान में आम चुनाव से पहले वहाँ जाएंगे.

इसके पहले लंदन में नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो ने 'लोकतंत्र के एक घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर किए थे.

नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो किसी वक्त एक दूसरे के कट्टर विरोधी थे. लेकिन अब दोनों नेताओं ने मिलकर मौजूदा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के शासन के ख़िलाफ़ अभियान चलाने का फ़ैसला किया है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में अगले साल आम चुनाव है और इसे उसकी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

एक साथ

ग़ौरतलब है कि बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ को छह साल पहले निर्वासित कर दिया गया था.

पाकिस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने 1999 में नवाज़ शरीफ़ सरकार का तख़्ता पलट दिया था और सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.

फिर नवाज़ शरीफ़ पर चले मुक़दमे में उन्हें देशद्रोह और करों की चोरी के आरोपों में उम्र क़ैद की सज़ा सुना दी गई थी.

लेकिन अगले साल उनकी सज़ा माफ़ कर दी गई और नवाज़ शरीफ़ को सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया.

नवाज़ शरीफ़ सन् 2000 से ही सऊदी अरब मे निर्वासन का जीवन बिता रहे हैं. समझौते के तहत वो 2010 तक पाकिस्तान वापस नहीं लौट सकते हैं.

दूसरी ओर बेनज़ीर भुट्टो ने 1996 में सेना द्वारा सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही ख़ुद देश से राजनीतिक निर्वासन ले रखा है और वो दुबई और लंदन में रहती हैं.