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शनिवार, 01 जुलाई, 2006 को 09:59 GMT तक के समाचार

विदर्भ के लिए अरबों रूपए का पैकेज

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विदर्भ क्षेत्र के बदहाल किसानों को राहत देते हुए 37 अरब 50 करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा की है.

इस पैकेज के तहत घोषित राशि में से 21 अरब 77 करोड़ रूपए की राशि कृषि परियोजनाओं पर ख़र्च की जाएगी और किसानों का 7 अरब 12 करोड़ रूपए का कर्ज़ माफ़ कर दिया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने के लिए विदर्भ क्षेत्र के सभी छह ज़िलाधिकारियों को 50-50 लाख रूपए दिए जाएँगे.

प्रधानमंत्री ने नागपुर में इस पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि इस पैकेज का इस्तेमाल अगले तीन वर्षों में इस क्षेत्र के किसानों के हित में किया जाएगा.

इस राहत पैकेज को विदर्भ क्षेत्र के छह ज़िलों अमरावती, वर्धा, अकोला, वाशिम, बुलधाना और यावतमाल में इस्तेमाल किया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने पैकेज की घोषणा करते हुए पत्रकारों से कहा, "विदर्भ के किसानों की समस्या हमारे लिए काफ़ी गंभीर विषय है. इसीलिए इस योजना के लागू होने की निगरानी मेरा कार्यालय ख़ुद करेगा. हम इस बात का ध्यान रखेंगे कि जो वादे किए गए हैं, उन्हें पूरा किया जाए."

उन्होंने कहा कि इस पैकेज से क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में तो सुधार होगा ही, साथ ही कर्ज़ का बोझ भी हल्का होगा.

चिंता

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया, "मैंने पाया कि कई किसानों ने जितना कर्ज़ लिया था, उनपर उससे भी ज़्यादा ब्याज़ हो गया है. इसे ध्यान में रखते हुए 1275 करोड़ रूपए के कृषि ऋण की व्यवस्था की जाएगी और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बोर्ड के समूह गठित किए जाएंगे."

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पूरी स्थिति पर नज़र रखेंगे. उन्होंने कहा कि इस पर भी नज़र रखी जाएगी कि योजनाओं को ठीक से लागू किया जाए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार की कुछ नीतियों में बदलाव करने की ज़रूरत महसूस होती है तो उस बारे में भी सोचा जा सकता है.

पैकेज में यह भी कहा गया है कि कपास की उपज को सुधारने के लिए किसानों को बड़े पैमाने पर अच्छा बीज उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए एक अरब 80 करोड़ रूपए की मंज़ूरी दी गई है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या के मामलों को केंद्र सरकार ने काफ़ी गंभीरता से लिया है और इसीलिए अब इस बात पर भी ध्यान दिया जाएगा कि किसानों के पास कृषि के अलावा आमदनी के अन्य साधन भी उपलब्ध हों.

इसी को ध्यान में रखते हुए मत्स्य पालन जैसे अन्य रोज़गार वाले विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए एक अरब 35 करोड़ रूपए की घोषणा की गई है. प्रधानमंत्री ने एक विशेषज्ञ समूह का गठन करने का भी ऐलान किया.

ग़ौरतलब है कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान बढ़िया फसल नहीं होने के कारण कर्ज़ में फंसे लगभग 1600 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.