गुरुवार, 29 जून, 2006 को 08:20 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार करने के जुर्म में चार लोगों को गुरूवार को फाँसी पर लटकाकर मौत की सज़ा दे दी गई.
इन चार लोगों को पंजाब प्रांत के फ़ैसलाबाद ज़िले की जेल में सुबह फाँसी पर लटकाया गया.
फ़ैसलाबाद की एक विशेष अदालत ने इन चार लोगों को सात साल पहले एक लड़की के साथ बलात्कार करने के जुर्म में मौत की सज़ा सुनाई थी.
लाहौर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस सज़ा को बरक़रार रखा था और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी इन चारों अपराधियों की रहम की अपील नामंज़ूर कर दी थी.
इन लोगों ने केंद्रीय शरीयत अदालत से भी अपनी सज़ा पर फिर से ग़ौर करने की अपील की थी लेकिन वहाँ से भी यह अपील नामंज़ूर हो गई थी.
फ़ैसलाबाद ज़िला कारागार के अधीक्षक यूसुफ़ ग़ौरी ने बताया कि फाँसी पाने वालों में 35 वर्षीय उमर हयात, 34 वर्षीय मोहम्मद अशरफ़, 33 वर्षीय मुबारक अली और 32 वर्षीय शहज़ाद अहमद शामिल हैं.
इन लोगों पर आरोप था कि उन्होंने 1999 में फ़ैसलाबाद ज़िले के चक झुमरा थाने के एक गाँव - चक 144 के एक घर में घुसकर वहाँ एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया था. अदालत ने इन चारों को इस मामले में दोषी क़रार दिया था.
उन चारों लोगों पर यह भी आरोप था कि उन्होंने घर से पचास हज़ार रुपए और ज़ेवरात भी लूट लिए थे. उन पर आतंक निरोधक क़ानून की दफ़ा सात के तहत मुक़दमा क़ायम किया गया था जिसमें सज़ाए मौत से बचने की गुंजाइश नहीं होती.
जेल के अधिकारियों के अनुसार फाँसी पाने वालों की लाशें उनके संबंधियों के हवाले कर दी गईं हैं.
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक वर्ष 2005 में पाकिस्तान में अदालतों ने 241 लोगों को विभिन्न अपराधों में फाँसी की सज़ा सुनाई थी जिनमें से ज़्यादातर पर हत्या करने का आरोप था.
उनमें से 32 लोगों को फाँसी दी जा चुकी है जबकि वर्ष 2004 में पाकिस्तान की अदालतों ने 456 लोगों को फाँसी की सज़ा सुनाई थी जिनमें से 29 को फाँसी पर लटकाकर मौत की सज़ा दी जा चुकी है.