बुधवार, 28 जून, 2006 को 10:30 GMT तक के समाचार
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने ज़ोर देकर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई छोड़ी नहीं जाएगी.
कोंडोलीज़ा राइस ने पाकिस्तान के बाद बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान का दौरा किया है जहाँ काबुल में उन्होंने यह बात कही है.
इससे पहले पाकिस्तान दौरे के दौरान उन्होंने तालेबान के ख़िलाफ़ युद्ध में ज़्यादा एकजुटता दिखाने की सलाह दी थी.
कोंडोलीज़ा राइस ने बुधवार को अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात की है.
डॉक्टर राइस ने कहा कि उनका देश पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के साथ एकजुट होकर 'सामान्य शत्रु' से लड़ाई में कामयाबी हासिल करेगा.
राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने पिछले सप्ताह कहा था कि तालेबान के ख़िलाफ़ नैटो और अमरीकी सेनाओं का जो अभियान चल रहा है उसमें सैकड़ों अफ़ग़ानियों की मौत को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
डॉक्टर राइस ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से हुई मुलाक़ात के बाद दोनों देशों की तारीफ़ करते हुए कहा था कि दोनों ही देश अमरीका के सहयोगी हैं.
उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से अनुरोध किया था कि वे तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई में अफ़ग़ानिस्तान का निकट सहयोग करें.
उधर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के एक प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तान अपनी उपयुक्त भूमिका निभा रहा है.
वैसे हाल के महीनों में तालेबान संघर्ष में बढ़ोत्तरी हुई है और इसके लिए अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान को दोषी ठहराया है.
कोंडोलीज़ा राइस ने पाकिस्तान में कहा, "दोनों देशों के बीच सीमा एक मुश्किल इलाक़ा है."
उनका कहना है कि ये समस्या कल नहीं शुरु हुई है, ये तो पिछले सौ सालों से है.
उन्होंने कहा कि अमरीका आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध में दोनों देशों का मित्र है.
बिगड़ती स्थिति
पिछले कुछ महीनों में अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है और तालेबान के हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है और इसके साथ ही दोनों देशों के संबंधों में भी तनाव बढ़ा है.
बीबीसी संवाददाता एलेस्टेयर लीथहेड का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में चाहे किसी से भी बात की जाए, चाहे वह गवर्नर हो या दुकानदार, सब का कहना है कि पाकिस्तान सीमापार से आने वाले चरमपंथियों को रोकने के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठा रहा है.
यहाँ तक कि राष्ट्रपति करज़ई भी पाकिस्तान की ओर ऐसा इशारा कर चुके हैं.
और पिछले हफ़्ते उन्होंने साफ़ कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेना को विद्रोहियों से निपटने की अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा था कि संयुक्त सेनाओं को चरमपंथ के केंद्र की ओर ध्यान देना चाहिए.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दूसरे शब्दों में करज़ई पाकिस्तान का ही नाम ले रहे थे.
उन्होंने अफ़ग़ान नागरिकों के मारे जाने पर सवाल उठाए थे.