बुधवार, 28 जून, 2006 को 16:51 GMT तक के समाचार
अपूर्व कृष्ण
बीबीसी संवाददाता, लंदन
भारतीय संसद की कार्यवाही लोगों तक सीधे पहुँचाने के उद्देश्य से दो विशेष टेलीविज़न चैनल शुरू किए जा रहे हैं जो चौबीसों घंटे चलेंगे.
इनमें से निचले सदन लोकसभा की कार्यवाही और अन्य गतिविधियों को दिखाने के लिए चौबीसों घंटे चलने वाला विशेष टीवी चैनल तो इसी मानसूत्र सत्र से शुरू होने जा रहा है.
भारतीय लोकसभा के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने बीबीसी को बताया कि यह विशेष चैनल 24 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से दिखने लगेगा.
राज्यसभा की कार्यवाही दिखाने वाला विशेष टीवी चैनल बाद में शुरू करने की योजना है.
भारत में दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक और सूचना प्रसारण सचिव रह चुके पूर्व नौकरशाह भास्कर घोष को संसद के लिए विशेष टीवी चैनल का मुख्य प्रभारी बनाया गया है.
सोमनाथ चटर्जी ने बताया कि ये विशेष चैनल पूरे देश में देखे जा सकेंगे जिसके लिए क़ानून बनाकर सभी केबल ऑपरेटरों के लिए इस चैनल को दिखाना अनिवार्य बना दिया गया है.
लोकसभा स्पीकर ने लोकसभा चैनल के उद्देश्य के बारे में कहा, "देश की सबसे बड़ी छवि संसद है और संसद में क्या हो रहा है ये जनता को पता चलना चाहिए."
"बहुत लोगों को पता नहीं होता कि जो क़ानून बनते हैं वो क्या होते हैं. चैनल पर बहस होंगे जिसमें मंत्री आएँगे, सांसद आएँगे जिससे कि लोगों को पता चल सकेगा कि ये क़ानून क्या हैं."
हंगामा भी काम भी
भारतीय संसद को लेकर आम लोगों में धारणा ये रहती है कि संसद बाहर से जितनी भव्य लगती है अंदर का नज़ारा उतना ही भयावह होता है.
चीख-पुकार, एक-दूसरे की बात काटना, नारेबाज़ी, फ़िकरेबाज़ी और यहाँ तक कि पिछले दिनों तो एक महिला सांसद ने स्पीकर पर काग़जों का एक बंडल ही दे मारा.
संसद में हंगामे का आलम ये था कि सोमनाथ चटर्जी ने दिसंबर 2004 में सांसदों के व्यवहार से क्षुब्ध होकर इस्तीफ़े की पेशकश कर दी थी और वे इसके बाद भी कई बार नाराज़गी जता चुके हैं.
लेकिन 1971 से लेकर अब तक 10 बार लोकसभा में पहुँचे अनुभवी सांसद सोमनाथ चटर्जी का कहना है कि हंगामे के बीच भी काम तो होता ही रहता है.
वह कहते हैं ,"हंगामा होता है, 30 दिन में एक दिन होता है, दिन में कुछ घंटे होता है, लेकिन काम भी होता है. हम लोकसभा चैनल से यही दिखाना चाहते हैं कि केवल हंगामा ही नहीं काम भी होता है".
अपने इस्तीफ़े की पेशकश के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया, "हाँ मैं थोड़ा भावुक हो गया था लेकिन फिर तय किया कि जो ज़िम्मेदारी दी गई उसे छोड़ना नहीं चाहिए."
सोमनाथ चटर्जी ने उम्मीद जताई कि संसद के मानसून सत्र में शांति रहेगी.
हालाँकि उनके इस वाक्य से कि - 'मैं तो केवल अपील कर सकता हूँ' - एक तरह से लोकसभा अध्यक्ष की बेबसी का अंदाज़ा होता है.