मंगलवार, 27 जून, 2006 को 07:21 GMT तक के समाचार
उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ की पारंपरिक रथयात्रा मंगलवार से शुरु हो गई है. हर साल की तरह इस साल भी हज़ारों लोग इसमें हिस्सा ले रहे हैं.
ऐसी ही एक पारंपरिक रथ यात्रा अहमदाबाद में भी निकल रही है.
दोनों ही जगह सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
बारहवीं शताब्दी के पुरी मंदिर से जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की मूर्तियों को विशालकाय रथ में लाकर रख दिया गया है.
हज़ारों हिंदू श्रद्धालु इसे ख़ुद खींचकर दो किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक ले जाएँगे.
12 दिन चलने वाली इस धार्मिक उत्सव के अंतिम दिन तीनों मूर्तियों को वापस जगन्नाथ मंदिर में वापस लाया जाएगा.
परंपरा
जगन्नाथ को कृष्ण का अवतार माना जाता है. बलदेव उनके भाई बलराम का दूसरा नाम है और सुभद्रा उनकी बहन है.
इन तीनों की मूर्तियों को विशिष्ट माना जाता है क्योंकि ये तीनों मूर्तियाँ पारंपरिक रुप में नहीं हैं और माना जाता है कि वे आदिवासी रुप में हैं.
रथयात्रा के लिए जिन रथों का उपयोग किया जाता है उनको हर बार नया बनाया जाता है और इसे लोग ख़ुद खींचकर ले जाते हैं.
तीन अलग रथ होते हैं और इनमें से हर किसी में छह विशालकाय पहिए होते हैं.