http://www.bbcchindi.com

बुधवार, 28 जून, 2006 को 05:29 GMT तक के समाचार

गौहर नज़ीर शाह
श्रीनगर से

अमरनाथ यात्रा से प्रदूषण पर चिंता

भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में प्रतिवर्ष होने वाली अमरनाथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु आते हैं लेकिन इस यात्रा का एक पहलू इस दौरान होने वाला प्रदूषण भी है.

पवित्र अमरनाथ गुफ़ा के दर्शन के लिए देश के कई हिस्सों से लोग यहाँ पहुँचते हैं पर उनकी उपस्थिति से घाटी के पर्यावरण संतुलन पर भी असर पड़ता है.

जम्मू-कश्मीर राज्य के पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में यात्रा के कारण होने वाले प्रदूषण का विस्तार से ज़िक्र किया है और इस संदर्भ में कुछ चीज़ों पर पाबंदियाँ लगाने की सिफ़ारिश भी की है.

पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष इरशाद अहमद ख़ान ने रिपोर्ट में कहा है, "अमरनाथ यात्रा को हिंदू धर्म में एक ख़ास स्थान प्राप्त है लेकिन यात्रियों का बड़ी संख्या में कश्मीर की ख़ूबसूरत पहाड़ियों में जमा होना यहाँ के पर्यावरण संतुलन को प्रभावित करता है."

यात्रा के कारण पहलगाम से बहने वाली लद्दर नदी का पानी भी प्रदूषित हो जाता है क्योंकि यात्री इस स्थान पर ठहरकर नदी के किनारे नहाते हैं, कपड़े-बर्तन जैसी चीज़ें धोते हैं और शौच जैसी दैनिक क्रियाएँ भी करते हैं.

बोर्ड के शोध के अनुसार यात्रा के दौरान जो कूड़ा-करकट जमा होता है और होटलों से जो गंदगी निकलती है वह सब-कुछ आख़िरकार लद्दर नदी में बहा दी जाती है.

चिंता

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदूषित सामग्री को अवैज्ञानिक ढंग से नष्ट किया जाता है जिससे पर्यावरण प्रदूषण में न केवल वृद्धि होती है बल्कि कई बिमारियाँ जैसे हैजा, टॉयफॉइड, बुख़ार और कुछ दूसरे संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है.

रिपोर्ट में सुझाया गया है कि भविष्य में यात्रियों की संख्या में कमी होनी चाहिए. इसके अलावा पहलगाम के क्षेत्र और गुफ़ा के रास्ते तक प्लास्टिक के लिफ़ाफ़ों के प्रयोग पर पूरी पाबंदी लागू होनी चाहिए.

रिपोर्ट के मुताबिक़ यह भी ध्यान देना होगा कि ठोस कूड़े को पानी और जंगल वाले क्षेत्रों के निकट नष्ट न किया जाए और पहलगाम की लद्दर नदी के किनारे किसी भी यात्री को शौच की अनुमति नहीं होनी चाहिए.

रिपोर्ट में सिफ़ारिशों को अमल में लाने के लिए कड़े क़ानून बनाने की भी बात की गई है.

राज्य के मुख्य सचिव फूनसांग ने श्रीनगर में पत्रकारों को बताया कि सरकार 'अमरनाथ मंदिर बोर्ड' के साथ मिलकर इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश में है कि वैज्ञानिक ढंग से ही ठोस कचरे को नष्ट किया जाए ताकि पर्यावरण की हर तरह से रक्षा हो सके.

ग़ौरतलब है कि पीडीपी के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद और राज्यपाल के बीच पिछले वर्ष भी यात्रा की अवधि को लेकर भी मतभेद हो गए थे.