गुरुवार, 22 जून, 2006 को 22:22 GMT तक के समाचार
केंद्र की यूपीए सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम को मंज़ूरी दे दी है.
गुरुवार को केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में इसे मंज़ूरी दी गई.
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को रोकना और अल्पसंख्यकों को शिक्षा और आय के बढ़ाने के अवसर देना है.
इसके तहत कई सरकारी योजनाओं में 15 प्रतिशत की राशि अल्पसंख्यकों के लिए आबंटित की जाएगी.
मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक दिखावा और तुष्टिकरण कहा है.
उद्देश्य
मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देते हुए वित्तमंत्री पी चिंदबरम ने बताया कि सरकार ने कई योजनाओं और कार्यक्रमों में 15 प्रतिशत राशि अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित करने का फ़ैसला किया है.
इसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाना और रोज़गार के साथ आय बढ़ाने के अवसर प्रदान करना है.
उन्होंने बताया कि इस 15 सूत्रीय कार्यक्रम में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को रोकने, हिंसा करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई और दंगा प्रभावित लोगों के पुनर्वास के प्रावधान हैं.
इसमें मदरसों के आधुनिकीकरण का भी प्रावधान किया गया है.
पुरानी योजना
राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने इस साल अपने अभिभाषण में कहा था कि सरकार अल्पसंख्यकों के लिए 15 सूत्रीय कार्यक्रम बना रही है.
दरअसल उसका अर्थ ये था कि पुराने कार्यक्रम को नए ढंग से लागू करने की योजना बनाई जा रही है.
अल्पसंख्यकों के लिए 15 सूत्रीय कार्यक्रम दरअसल दो दशक से भी अधिक समय से चला आ रहा है.
यूपीए सरकार ने उसी कार्यक्रम में रंगरोगन कर दिया है.
अल्पसंख्यकों के लिए पहली बार 15 सूत्रीय कार्यक्रम इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में 1983 में बनाया गया था और बाद में राजीव गाँधी ने अपने कार्यकाल में इसका अनुमोदन किया और जारी रखा.
'तुष्टिकरण'
मुख्यविपक्षी दल भाजपा ने यूपीए सरकार के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम को राजनीतिक दिखावा और तुष्टिकरण बताया है.
भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार समाज को बाँचने में लगी हुई है.
भाजपा के उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा, "यूपीए सरकार दावा कर रही है कि ये अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए है लेकिन वास्तव ने ये यूपीए सरकार की राजनीतिक लाभ के लिए समाज को बाँटने की नीति का उदाहरण है."
उन्होंने आरोप लगाए कि यूपीए सरकार धर्म के आधार पर लोगों को बाँट रही है.