मंगलवार, 20 जून, 2006 को 07:37 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
छत्तीसगढ़ में संदिग्ध माओवादी विद्रोहियों ने सात ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या कर दी है.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 200 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा ज़िले के एक गांव पर 300 से अधिक हथियारबंद माओवादियों ने हमला किया और सात ग्रामीणों को मार डाला.
पुलिस का कहना है कि माओवादियों ने 25 ग्रामीणों को घरों से बाहर निकाला और उन्हें जंगल में ले गए. इनमें से सात को मार दिया गया और बाकी ग्रामीणों को छोड़ दिया गया.
उधर दंतेवाड़ा की उप पुलिस प्रमुख भावना पांडे ने बताया कि जिस जगह पर माओवादियों ने ग्रामीणों के शव बरामद किए हैं, वहाँ से कुछ पर्चे भी बरामद हुए हैं.
इन पर्चों में इस बात का खंडन किया गया है जिसके मुताबिक पुलिस और माओवादियों के बीच आठ जून को देवरपल्ली गांव में मुठभेड़ हुई थी.
पर्चे में यह भी कहा गया है कि इस मुठभेड़ में मारे गए लोग दरअसल आम नागरिक थे.
वजह
ऐसा माना जा रहा है कि इस घटना का संबंध राज्य में चल रहे माओवाद विरोधी अभियान से है जिसे सरकार समर्थन दे रही है.
पुलिस का कहना है कि माओवादियों ने ग्रामीणो से माओवादी विरोधी अभियान सलवा जुडुम के बारे में उनसे पूछताछ की.
पुलिस ने ग्रामीणों के हवाले से बताया कि माओवादियों ने उनकी पिटाई भी की.
छत्तीसगढ़ के 16 ज़िले माओवादी हिंसा से प्रभावित हैं और ये इतने शक्तिशाली हैं कि कई स्थानों पर ये अपनी समानांतर सरकार चलाते हैं.
सलवा जुडुम अभियान के तरह हज़ारों की संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं वो पूरे राज्य भर में बनाए गए सरकारी कैंपों में रह रहे हैं.
न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि माओवादी भारत के छह राज्यों में सक्रिय हैं और उनका कहना है कि वे भूमिहीन लोगों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ते हैं.
भारत सरकार के अनुसार देश भर मे दस हज़ार से अधिक माओवादी सक्रिय हैं.