मंगलवार, 20 जून, 2006 को 18:36 GMT तक के समाचार
महिलाओं पर की गई अपनी टिप्पणी के चार दिन बाद उपसेनाध्यक्ष लेफ़्टिनेंट जनरल एस पट्टाभिरमन ने माफ़ी माँगी है.
उन्होंने कह दिया था कि सेना में महिलओं के ज़रुरत नहीं है.
उनकी इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी.
राजनीतिक दलों और महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने उनके इस्तीफ़े की माँग की थी.
जम्मू कश्मीर में एक महिला सैन्य अधिकारी के आत्महत्या कर लेने के बाद सेना उपप्रमुख ने ये टिप्पणी की थी.
उल्लेखनीय है कि दस लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना में सिर्फ़ एक हज़ार महिलाएँ हैं और उनमें से कोई भी मोर्चे पर नहीं हैं.
माफ़ी
गुरुवार को जारी एक बयान में लेफ़्टिनेंट जनरल एस पट्टाभिरमन ने अपने बयान के लिए माफ़ी माँगी है.
उन्होंने कहा है, "यदि मेरे बयान से महिला अधिकारियों के प्रति सम्मान को लेकर मेरी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के प्रति कोई संदेह पैदा हुआ हो तो मुझे माफ़ी माँगने में कोई संकोच नहीं है."
उन्होंने कहा कि वे सेना में महिला अधिकारियों के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता रखते हैं और उनके प्रति स्वस्थ्य सम्मान की दृष्टि रखते हैं.
उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में एक महिला सैन्य अधिकारी सुष्मिता चक्रवर्ती के आत्महत्या कर लेने के बाद एक अख़बार में लेफ़्टिनेंट जनरल एस पट्टाभिरमन के हवाले से कहा गया था कि सेना का काम महिला अधिकारियों के बिना भी चल सकता है.
इस पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा था कि उन्हें तुरंत पद से हटा देना चाहिए और कह देना चाहिए कि 'सेना का काम उनके बिना चल सकता है.'
राष्ट्रीय महिला आयोग ने उनके इस बयान को ग़ैरज़िम्मेदाराना ठहराया था.
जबकि भारतीय सेना ने कहा था कि लेफ़्टिनेंट जनरल पट्टाभिरमन के बयान को ग़लत संदर्भों में प्रकाशित किया गया.
जबकि रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि सरकार चाहती है कि सेना में और अधिक संख्या में महिलाएँ आएँ.
उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना में महिलाओं की भर्ती 14 बरस पहले ही शुरु हुई है.