सोमवार, 19 जून, 2006 को 15:49 GMT तक के समाचार
श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों से अपील की है कि वे फिर से शांति वार्ता शुरू करें. लेकिन इस बीच जाफ़ना प्रायद्वीप में सरकारी सेना और एलटीटीई के बीच भारी गोलीबारी हुई है.
पिछले कुछ दिनों से सरकारी सेना और एलटीटीई के बीच संघर्ष तेज़ हुआ है और क़रीब 100 लोग मारे गए हैं.
सोमवार को श्रीलंका की सरकार ने पहल करते हुए एलटीटीई से अपील की कि वे चाहें तो सीधे बातचीत कर सकते हैं या फिर नॉर्वे के शांति दूतों के माध्यम से भी शांति वार्ता शुरू हो सकती है.
हालाँकि इस बीच जाफ़ना प्रायद्वीप में सरकारी सैनिकों और तमिल विद्रोहियों की बीच भारी गोलीबारी हुई है. दोनों पक्षों ने गोलीबारी शुरू करने के लिए एक-दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराया है.
देश के उत्तर में स्थित एलटीटीई के नियंत्रण वाले वन्नी इलाक़े के ऊपर वायु सेना के जेट विमानों ने उड़ान भरी. सैनिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर प्रसाद समरसिंघे ने इसकी पुष्टि की है.
आशंका
उन्होंने कहा कि वायु सेना श्रीलंका के क्षेत्र में उड़ान भर रहे थे. हालाँकि किसी तरह के हवाई हमले की कोई ख़बर नहीं है.
हाल के दिनों में सरकारी सेना और एलटीटीई के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि मामला युद्ध के स्तर तक पहुँच सकता है.
सरकार के बयान में ये कहा गया है कि इससे पहले की देश युद्ध में फँस जाए, एलटीटीई शांति वार्ता के लिए आगे आए.
चार साल पहले 2002 में नॉर्वे की मध्यस्थता से श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच संघर्ष विराम हुआ था.
लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सिद्धांत रूप में भले ही संघर्ष विराम अभी क़ायम हो लेकिन वास्तविकता ये नहीं.
श्रीलंका सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "सरकार एलटीटीई के साथ बातचीत करना चाहती है ताकि संघर्ष के कारणों पर विचार-विमर्श किया जाए जिससे बात हथियार उठाने तक पहुँच गई है."
सरकार की पेशकश पर अभी एलटीटीई की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है. पिछले गुरुवार को यात्री बस के बारूदी सुरंग की चपेट में आ जाने से 64 लोग मारे गए थे.
उसके बाद सरकारी सैनिकों ने एलटीटीई के ठिकाने को निशाना बनाया.
एलटीटीई की ओर से कई इलाक़ों में जवाबी कार्रवाई हुई. पिछले पाँच दिनों के अंदर वहाँ क़रीब 100 लोग मारे गए हैं.