सोमवार, 12 जून, 2006 को 07:00 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
बात बात पर तलाक़ की बढ़ती प्रवृत्ति से परेशान राजस्थान के मुस्लिम भिश्ती समाज ने फ़ैसला किया है कि उनके समाज में अब और तलाक़ नहीं होंगे.
समाज ने फ़ैसला किया है कि बस्ती-बस्ती समितियाँ बनाई जाएँगी जो ऐसे मामलों पर नज़र रखेंगी.
ग़लती करने वाले पक्ष को समाज जुर्माने और बहिष्कार कर की सज़ा दे सकेगा.
यह फ़ैसला शुक्रवार की रात राज्य की राजधानी जयपुर में देर तक चली समाज के पंच प्रमुखों की बैठक में लिया गया.
शहर की 42 मुस्लिम भिश्ती बस्तियों के पंच प्रधानों ने लंबे सोच विचार के बाद कहा है कि बस्तियों में प्रभावी लोगों की समितियाँ बनेंगी जो कि तलाक़ से पैदा होने वाली समस्याओं पर सुलह-सफ़ाई का रास्ता निकालेगी.
समाज के लोगों ने कहा कि कुछ युवा 10 रूपए के स्टांप पेपर पर काज़ी के दस्तख़त कराकर तलाक़ दे देते हैं.
भिश्ती समाज ने इसपर भी रोक लगाने का निर्णय लिया है.
समाज के लोगों ने बीबीसी को बताया कि हाल के दिनों में उनके समाज में तलाक़ के एक दर्जन मामले सामने आए हैं.
चिंता
समाज के सचिव इकरमुद्दीन कहते हैं कि छोटी-छोटी बातों पर तलाक़ ने समाज में चिंता पैदा कर दी हैं.
इकरमुद्दीन कहते हैं, "ग़लतियाँ दोनों तरफ़ से हो सकती हैं लेकिन उसे मिल-बैठकर सुलझाया जा सकता है. पुलिस-कचेहरी और बिचौलियों के चक्कर में काफ़ी पैसा और समय भी बर्बाद होता है."
भिश्ती समाज की इस बैठक में 900 से भी ज़्यादा लोग इकट्ठा हुए थे.
भिश्ती समाज के एक मंच, शेख़ जमुतुल अब्बास के पूर्व सचिव अब्दुल मजीद अब्बासी कहते हैं, "इस्लामी तौर-तरीकों का पालन करते हुए तलाक़ के बढ़ते हुए मामलों पर रोक लगाई जाएगी."
भिश्ती समाज के क़ायम भाई कहते हैं कि कुछ मामले उनके सामने आए थे जिनसे उन्हें लगा कि तलाक़ की व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है.
वो बताते हैं कि बस्तीवार 25-25 लोगों की समितियां बनाई जाएँगी जो मोहल्लेवार ऐसे मामलों पर नज़र रखेंगी.
किसी मामले में सुलह-सफ़ाई से बात नहीं बनी तो मामला पूरे समाज के समक्ष रखा जाएगा और इन मामलों में समाज का निर्णय अंतिम होगा.
सराहनीय प्रयास
उल्लेखनीय है कि जयपुर में मुस्लिम भिश्ती समाज की तादाद 30 हज़ार से भी ज़्यादा है और समाज के लोगों का कहना है कि इस फ़ैसले से बाक़ी बिरादरियों को भी मदद मिलेगी.
मुस्लिम वेलफ़ेयर सोसाइटी की प्रतिनिधि, निशात हुसैन ने भिश्ती समाज के इस क़दम का स्वागत किया है.
वो कहती हैं, "तलाक़ की अवधारणा अच्छी है लेकिन इसका ग़लत उपयोग नहीं होना चाहिए. इस्लाम में औरत की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है."
बहरहाल, भिश्ती समाज की यह पहल उन लोगों के लिए सुकून का पैग़ाम लेकर आई है जो औरत-मर्द के दरकते रिश्तों को लेकर परेशान हैं.
संबंधों के सेतु फिर बनेंगे, जब ऐसी पहल से मतभेद दूर होंगे और बिछुड़े एक-दूसरे से गले मिलेंगे.