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शनिवार, 10 जून, 2006 को 18:14 GMT तक के समाचार

नेपाल नरेश के अधिकारों में कटौती

नेपाल की संसद ने नेपाल नरेश के अधिकारों को और कम करने संबंधी एक क़ानून पारित किया है जिसके तहत नरेश को अब संसद का आह्वान करने का अधिकार नहीं मिलेगा.

नए क़ानून के तहत राजा से नेपाल सरकार की वार्षिक नीतियों और कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा करने का अधिकार भी छीन लिया गया है.

पिछले महीने ही एक अन्य ऐतिहासिक क़ानून के तहत नेपाल नरेश के कई अधिकार समाप्त कर दिए गए थे और उनके पास नाममात्र के अधिकार बचे थे.

अब संसद का आह्वान करने और कार्यक्रमों-नीतियों की घोषणा का अधिकार प्रधानमंत्री को होगा.

इतना ही नहीं नए क़ानून के तहत संसद जिन क़ानूनों को लागू करेगा उसके लिए राजा की पारंपरिक अनुमति की भी ज़रुरत नहीं होगी.

इसी क़ानून में यह प्रावधान भी किया गया है कि नेपाल के राजसिंहासन के उत्तराधिकारी के चयन के लिए एक नया क़ानून बनाया जाए.

इससे पहले संसद ने राजा को सलाह देने वाली राज परिषद को भी भंग कर दिया था जो कि राजा के उत्तराधिकारी के चयन संबंधी प्रक्रिया देखती थी.

वामपंथी सांसद नारायण राज बिजूकुछे ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि नए क़ानून से अब सत्ता वाकई में नेपाल नरेश के हाथों से निकल कर संसद के पास आ सकेगी.

बिजूकुछे उस समिति के अध्यक्ष थे जिन्होंने इस नए क़ानून की रुपरेखा तैयार की है.

पिछले महीने नेपाल की संसद ने राजा के अधिकारों को कम करने संबंधी ऐतिहासिक क़ानून बनाया था सेना पर से राजा का नियंत्रण हटा लिया गया और शाही परिवार की संपत्ति को आयकर के घेरे में ले लिया गया.

इस ऐतिहासिक क़ानून के तहत एक प्रतिनिधि सभा के चयन की बात कही गई थी जो राजा के भविष्य का निर्धारण करती. प्रतिनिधि सभा के गठन की मांग लंबे समय से माओवादी करते रहे हैं जो राजतंत्र की समाप्ति के लिए संघर्ष चला रहे हैं.

अब नेपाल की सत्ता संभाल रहा सात दलों का गठबंधन माओवादियों के साथ वार्ता कर रहा है. गठबंधन राजतंत्र को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में नहीं है जबकि माओवादी इसे पूरी तरह समाप्त करना चाहते हैं.