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बुधवार, 07 जून, 2006 को 11:42 GMT तक के समाचार

जिल मैकगिवरिंग
बीबीसी संवाददाता, छत्तीसगढ़ से लौटकर

नेपाल से उत्साहित हैं भारत के नक्सलवादी

छत्तीसगढ़ के जंगलों में क्रांतिकारी गानों की धुनों पर छह नक्सली लड़ाके मार्च करते हुए चल रहे हैं.

सब की उम्र 20 वर्ष के आसपास है. इनमें पुरुष और महिलाएँ दोनों हैं. सब ने वर्दी पहन रखी है और सब के हाथों में बंदूकें हैं.

इन नक्सलियों के साथ छत्तीसगढ़ में दो दिनों के अनुभव के दौरान इस टुकड़ी के कमांडर गोपन्ना मरकम ने बताया कि हालांकि नेपाल में हुए परिवर्तनों पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की गई है पर इससे क्षेत्र में काम कर रहे नक्सलियों का मनोबल काफ़ी बढ़ा है.

कुछ ऐसा ही चेहरा है भारत में सक्रिय नक्सली आंदोलन का. देशभर में नक्सली आंदोलन से जुड़े लोग नेपाल में हाल के परिवर्तनों को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं.

बातचीत के दौरान कमांडर मरकम ने कहा, "हम नेपाल की ओर काफ़ी आशाओं के साथ देख रहे हैं. यह क्रांति सफल रहे ताकि दुनियाभर में एक संदेश जा सके. ऐसा इस दुष्प्रचार को ख़त्म करने के लिए भी ज़रूरी है कि समाजवाद का दौर समाप्त हो गया है और नेपाल इसे स्थापित करने में मदद करेगा."

वो आगे कहते हैं कि अगर नेपाल के माओवादी और शक्तिशाली होते हैं तो इससे भारत में इस आंदोलन से जुड़े लोगों को और समर्थन मिलेगा.

उन्होंने बताया कि दोनों ही देशों में सक्रिय माओवादी एक दूसरे के संपर्क में हैं. दोनों की विचारधारा भी एक ही है और दोनों ही कम्युनिस्ट क्रांति के लिए काम कर रहे हैं.

चिंता

कुछ भारतीय माओवादी तो यह भी दावा करते हैं कि उन्होंने नेपाल में प्रशिक्षण प्राप्त किया है.

पर भारत सरकार के लिए यह एक संवेदनशील दौर है क्योंकि पिछले एक वर्ष में माओवादी गतिविधियों में तेज़ी आई है.

वर्ष 1960 के दशक से भारत में शुरू हुए इस आंदोलन को पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए अबतक का सबसे बड़ा ख़तरा बताया था.

चिंता की बात यह भी है कि अभी तक टुकड़ों में काम कर रहे माओवादी अब संगठित रूप से सामने आ रहे हैं.

उत्तर में नेपाल से लेकर दक्षिण में समुद्री तटक्षेत्रों तक फैले, देश के एक बड़े भू-भाग पर वे सक्रिय हैं. छत्तीसगढ़ इनके मज़बूत प्रभाव वाले क्षेत्रों में से एक है.

इस राज्य में पिछले कुछ समय में सरकार ने सलवा जुड़ूम जैसे अभियानों और पुलिस की मदद से माओवादी आंदोलन को कुचलने की कोशिश भी की लेकिन राज्य में नाटकीय रूप से हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है.