सोमवार, 05 जून, 2006 को 05:39 GMT तक के समाचार
असित जौली
बीबीसी संवाददाता, चंडीगढ़
भारतीय राज्य पंजाब में एक अनोखा वृद्धाश्रम तैयार किया गया है जिसमें इंसान नहीं, बूढ़े हो चले बब्बर शेरों को रखा गया है.
देशभर में यह इस तरह का पहला प्रयास है.
बब्बर शेरों के इस वृद्धाश्रम को पंजाब में चंडीगढ़ के पास बसे छतबीड़ चिड़ियाघर में बनाया गया है जहाँ बूढ़े होने वाले शेरों को विशेष देखभाल के साथ उनके अंतिम वर्षों में रखा गया है.
छतबीड़ चिड़ियाघर के 23 में से छह सबसे बुज़ुर्ग बब्बर शेरों को रखा गया है.
ये 'बुज़ुर्ग' यहाँ के खुलेपन और प्राकृतिक परिवेश में खुश नज़र आ रहे हैं.
समस्याएं
ग़ौरतलब है कि छतबीड़ सहित देशभर के कई चिड़ियाघरों में पिछले कुछ वर्षों में बब्बर शेरों की देखभाल से संबंधित कई समस्याएं पैदा हो गई थीं.
बताया गया कि 70 के दशक में बड़े पैमाने पर शुरू किए गए प्रजनन कार्यक्रम के चलते भारत में बब्बर शेऱों की संख्या में वृद्धि हुई और इनकी संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई थी.
पर बाद में पाया गया कि अफ़्रीकी और एशियाई नस्लों के मिश्रण से तैयार नस्ल और फिर इनके लगातार प्रजनन से पैदा हो रहे बब्बर शेर कमज़ोर थे और आसानी से बीमारियों के शिकार हो रहे थे.
छतबीड़ के निर्देशक, कुलदीप कुमार ने बताया, "कमज़ोर नस्ल का होने के कारण ही एक समय पर 100 शेरों वाले इस चिड़ियाघर में, कुछ वर्षों पहले लगभग सभी युवा शेर बीमार होकर मर गए."
इस समस्या से निबटने के लिए क़रीब एक वर्ष पहले भारत के केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने चिड़ियाघरों में मौजूद संकरित बब्बर शेरों के प्रजनन पर रोक लगा दी थी.
कुलदीप कुमार और उनके साथियों ने तय किया कि चिड़ियाघर में बचे 23 शेरों में से सारा समय अपने पिंजड़ों में पड़े रहकर बिताने वाले बुज़ुर्ग शेरों के लिए कुछ विशेष व्यवस्थाएँ की जाएँ.
इसके बाद छतबीड़ चिड़ियाघर के धने जंगल वाले एक हिस्से में इन बुज़ुर्ग बब्बर शेरों के लिए इस वृद्धाश्रम का निर्माण किया गया.
इस काम के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की ओर से 20 लाख रूपए की मदद भी मुहैया कराई गई है.