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शनिवार, 03 जून, 2006 को 15:54 GMT तक के समाचार

मासूम मुईज़ श्रीनगर के रास्ते पर

दो वर्षीय मुईज़ इसहाक ने आख़िरकार पाकिस्तान और भारत सरकारों से इजाज़त मिलने के बाद अपने दादा के साथ एक कश्मीर से दूसरे कश्मीर में अपने घर पहुँचने के लिए सीमा पार कर ली है.

मुईज़ अपने दादा के साथ रहने की मंशा से शनिवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से सीमा पार करके भारत प्रशासित कश्मीर में दाख़िल हुआ.

आठ अक्तूबर 2005 को कश्मीर में आए भूकंप में मुईज़ ने अपनी माँ और पिता दोनों को ही खो दिया था.

मुईज़ की माँ भारत प्रशासित कश्मीर से थीं जबकि उसके पिता पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के रहने वाले थे और इसी उलझन में मुईज़ को अपने दादा के साथ जाने की इजाज़त के लिए बहुत दिन का इंतज़ार करना पड़ा.

शनिवार को मुईज़ ने वाघा के ज़रिए पाकिस्तान से भारतीय क्षेत्र में क़दम रखा. उसके पाकिस्तानी संबंधियों ने कहा कि उस समय पाकिस्तानी अधिकारियों ने तो कोई रुकावट नहीं रखी.

लेकिन भारतीय अधिकारियों ने मुईज़ और संबंधियों को कई घंटे तक बिठाए रखा क्योंकि मुईज़ के पास पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं थे.

इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त ने शुक्रवार को मानवीय आधार पर मुईज़ की अर्ज़ी स्वीकार कर ली थी और उसे भारत जाने की इजाज़त दे दी थी.

मुईज़ के संबंधियों का कहना है कि वे पासपोर्ट का इंतज़ार नहीं कर सकते थे क्योंकि मुईज़ के दादा अब्दुल अहद की तबीयत ठीक नहीं थी.

70 वर्षीय वृद्ध अब्दुल अहद क़रीब तीन महीने से मुईज़ को श्रीनगर ले जाने के लिए कोशिश कर रहे थे और पाकिस्तन प्रशासित कश्मीर में ही थे.

भारतीय दूतावास ने बीबीसी को बताया था कि बच्चे की नागरिकता के बारे में जाँच नहीं की जाएगी और उन्हें एक आपात सर्टीफ़िकेट जारी किया जाएगा ताकि वे भारतीय प्रशासित कश्मीर जा सकें.

हादसा

अक्तूबर 2005 में आए भूकंप में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद के रहने वाले मोहम्मद इसहाक़ और बेगम फ़ातिमा इसहाक़ की मौत हो गई थी जबकि उनका पाँच वर्षीय बेटा सदीस इसहाक और ढाई वर्षीय मुईज़ इसहाक ज़िंदा बच गए थे.

अब्दुल अहद ने बताया कि उनका बेटा इसहाक़ 1996 में श्रीनगर से मुज़फ़्फ़राबाद आ गया था और उसने भारतीय नागरिकता छोड़ कर पाकिस्तानी नागरिकता ले ली थी.

श्रीनगर की रहने वाली फ़ातिमा अपने संबंधियों से मिलने जब मुज़फ़्फ़राबाद आई तो इसहाक़ के साथ वर्ष 2000 में शादी हो गई और गर्भवती हो जाने के बाद 2001 में वह श्रीनगर वापस चली गई जहाँ उसने सदीस को जन्म दिया.

फ़ातिमा 2002 में सदीस के पासपोर्ट के सहारे दोबारा मुज़फ़्फ़राबाद आई और अपने पति के साथ रहने लगी. यहीं उसने अपने दूसरे बेटे मुईज़ को जन्म दिया था.