शुक्रवार, 02 जून, 2006 को 23:26 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने एड्स संबंधी संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के मसौदे पर निराशा व्यक्त की है. संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में इस मसौदे को स्वीकार किया गया है.
कोफ़ी अन्नान का कहना है कि घोषणापत्र अदूरदर्शी है क्योंकि इसमें समलैंगिक, वेश्याओं और मादक दवाओं के सेवन करनेवाले जैसे समूहों का उल्लेख नहीं किया गया है जबकि इन पर एड्स का गंभीर ख़तरा है.
दरअसल कुछ देशों का कहना था कि ऐसी गतिविधियों की अनदेखी कर दी जानी चाहिए.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि सम्मेलन की शुरुआत में वो जैसी उम्मीद कर रहे थे, घोषणापत्र उससे कहीं अधिक कड़ा है.
उनका कहना था कि कुछ देशों के नेताओं ने ही ऐसे समूहों का उल्लेख करने का विरोध किया. लेकिन अधिकतर देशों ने एड्स की चुनौती को स्वीकार किया है.
इस घोषणापत्र में सन् 2010 तक दुनिया भर में एड्स से बचाव की जानकारी और पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है.
लेकिन एड्स के ख़िलाफ़ अभियान चलानेवाले संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि यह घोषणापत्र कमज़ोर है क्योंकि इसमें लक्ष्य निर्धारित नहीं किए हैं और न ही विभिन्न देशों की सरकारों की जवाबदेही तय नहीं की गई है.
चुनौती
ग़ौरतलब है कि एचआईवी की पहचान हुए लगभग 25 वर्ष हो चुके हैं और एड्स एक विश्वव्यापी चुनौती बन गया है.
सन् 2005 तक इस रोग के विषाणुओं से संक्रमित लोगों की संख्या चार करोड़ से ऊपर जा चुकी है.
1981 में पहली बार इस बीमारी का पता चला था और तबसे लेकर अब तक दो करोड़ से अधिक लोग काल के ग्रास बन चुके हैं.
उम्मीद की जा रही थी कि इस रोग का टीका जल्दी विकसित कर लिया जाएगा, लेकिन वे प्रयास भी सफल नहीं हो पाए हैं.
संयुक्त राष्ट्र का 'थ्री बाई फ़ाइव' लक्ष्य भी पीछे रह गया है. इसके तहत वर्ष 2005 तक 30 लाख लोगों तक एड्स का सामना करनेवाली दवाएँ पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.