बुधवार, 31 मई, 2006 को 06:19 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों से फिर कहा कि वे अपनी हड़ताल, प्रदर्शन और किसी भी तरह का विरोध तुरंत ख़त्म करें और स्वास्थ्य सेवाएँ बहाल करें.
अदालत ने सरकार से कहा है कि यदि हड़ताल वापस ली जाती है और वे तीन दिन के भीतर काम पर लौटते हैं तो सरकार की ओर से डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और बर्खास्त डॉक्टरों की बहाली कर दी जाए.
केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट से ये भी कहा है कि आरक्षण को लेकर सरकार की किसी भी नई नीति की घोषणा इस पूरे मामले में अदालत के अंतिम फ़ैसले के प्रकाश में ही हो.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूरी स्थिति पर गुरुवार को एक स्थिति पत्र दाखिल करने को भी कहा है.
हड़ताली डॉक्टरों की ओर से अदालत में उपस्थित हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एलएम सिंघवी ने उम्मीद जताई है कि हड़ताल जल्दी ही ख़त्म हो जानी चाहिए.
केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़ी जातियों के छात्रों को आरक्षण देने के विरोध में मेडिकल छात्र और डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं.
उधर सरकार ने साफ़ कर दिया है कि आरक्षण जून 2007 से लागू हो जाएगा. हालांकि सरकार ने सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखने और इसके लिए संस्थानों में सीटें बढ़ाने का आश्वासन दिया है.
निर्देश
न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एसएस पंटा के अवकाश पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को केंद्र सरकार और हड़ताल कर रहे डॉक्टरों के तर्कों को सुना.
पीठ ने मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के रेसीडेंट डॉक्टरों की याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है.
अदालत ने डॉक्टरों से कहा कि वे किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन ख़त्म करके स्वास्थ्य सेवाएँ तुरंत बहाल करें और सभी डॉक्टर तीन दिन के भीतर ड्यूटी पर उपस्थित हों.
अदालत ने सरकार से कहा है कि वो पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के लिए कोई भी नीति बनाने से पहले इस पूरे मामले पर अदालत के अंतिम फ़ैसले को ध्यान में रखें.
सुप्रीम कोर्ट के पीठ ने आंदोलन कर रहे मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों से कहा है कि वो चाहें तो इस मामले में एक और याचिका दायर कर सकते हैं.
हड़ताल
वैसे सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के निर्देश मंगलवार को भी दिए थे और आंदोलन ख़त्म करने को कहा था.
लेकिन इसके बावजूद मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों ने हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया और दिल्ली के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को बंद रखने का निर्णय लिया था.
मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों में सामानांतर ओपीडी को भी बंद करने का निर्णय लिया था.
ख़बर लिखे जाने तक हड़ताल वापस नहीं ली गई थी.