बुधवार, 31 मई, 2006 को 19:36 GMT तक के समाचार
केंद्र सरकार का कहना है कि वह 'लाभ के पद' के विधेयक को आगामी संसद के मानसून सत्र में दोबारा पेश कर सकती है.
क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद ने जिस विधेयक को पारित किया, उसमें कोई कमी नहीं है. लेकिन राष्ट्रपति ने उसे वापस किया है तो उस पर पूरे सम्मान के साथ पुनर्विचार किया जाएगा.
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को राष्ट्रपति ने लाभ के पद संबंधी विधेयक को संसद में पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया था.
हंसराज भारद्वाज ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में विचार करने के लिए उन्होंने एक मसौदा तैयार कर लिया है. यह बैठक गुरुवार को होनेवाली है.
उनका कहना था कि कैबिनेट तय करेगी कि विधेयक उसी रूप में संसद के समक्ष लाया जाए या फिर संशोधित रूप में लाया जाए.
इधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाक़ात की. ख़बरें हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति से इस बारे में चर्चा की है.
दूसरी ओर भाजपा ने चुनाव आयोग को सौंपे एक ज्ञापन में लाभ के पदों पर बैठे 46 सांसदों के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर तुरंत निर्णय लेने का अनुरोध किया है.
राष्ट्रपति की आपत्ति
इसके पहले विधेयक को वापस करते हुए राष्ट्रपति कलाम ने कहा था कि कौन से पद लाभ के पद की परिधि में नहीं आते हैं, इसे तय करते वक्त निष्पक्षता का ध्यान रखना चाहिए.
साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केंद्र सरकार द्वारा पारित यह विधेयक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके.
राष्ट्रपति के इस क़दम के बाद सरकार के पास दो विकल्प हैं. या तो इस विधेयक में अपेक्षित संशोधन कर राष्ट्रपति के पास भेजा जाए.
या फिर इसी विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित करके फिर से राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाए. और ऐसी स्थिति में इस विधेयक को मंज़ूरी देना राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होगा.
उल्लेखनीय है कि जया बच्चन की राज्यसभा से सदस्यता ख़त्म किए जाने के बाद से लाभ के पद का विवाद चल रहा है.