मंगलवार, 30 मई, 2006 को 12:54 GMT तक के समाचार
भारत में आरक्षण के विरोध में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपनाते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस ने कहा है कि अब हड़ताल कर रहे लोगों से और बातचीत करने की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने पत्रकारों को बताया कि हड़ताल के प्रति सरकार का रवैया सख़्त हो रहा है और अगर बुधवार तक इसे ख़त्म करने की ठोस पहल नहीं होती है तो सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को चालू रखने के लिए वैकल्पिक तरीके अपना सकती है.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "कल(बुधवार) से हम इस मसले पर सख़्त रवैया अपनाएँगे. आवश्यकता पड़ी तो नए डॉक्टरों को नौकरी दी जाएगी या फिर सेना से भी डॉक्टर बुलाए जा सकते हैं."
ग़ौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर छात्र अपनी हड़ताल ख़त्म नहीं करते हैं तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा.
अंबुमणि रामदॉस ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार में प्रधानमंत्री सहित सभी स्तरों पर पिछले दो हफ़्तों में इन छात्रों से कई बार बातचीत की गई और मसले का हल निकालने की कोशिश की गई पर हड़ताली छात्र अभी भी अपनी ज़िद पर अड़े हुए हैं.
उन्होंने कहा कि हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हुई हैं जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी चिंता जताई है.
हड़ताल
उधर सुप्रीम कोर्ट और फिर सरकार की ओर से मिल रही चेतावनियों के बीच इस मसले पर आगे की रणनीति तय करने के लिए छात्रों की बैठक चल रही है.
हालांकि अभी बैठक ख़त्म नहीं हुई है पर हड़ताल कर रहे छात्रों के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे.
ग़ौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का विरोध कर रहे मेडिकल छात्रों को विरोध-प्रदर्शन और हड़ताल करते हुए एक महीने से भी ज़्यादा वक्त बीत चुका है.
इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है.
इससे पहले प्रधानमंत्री ने इसी हफ़्ते एक प्रस्ताव में छात्रों को आश्वासन दिया था कि आरक्षण की नई व्यवस्था के लागू होने से सामान्य वर्ग की सीटों की संख्या को कम नहीं होने दिया जाएगा.
छात्र प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है और उन्होंने कहा है कि देश में अब तक लागू आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए.