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मंगलवार, 30 मई, 2006 को 17:14 GMT तक के समाचार

भारतीय राष्ट्रपति ने विधेयक लौटाया

भारत के राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल क़लाम ने लाभ के पद संबंधी विधेयक पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया है.

भाजपा ने उनके क़दम का स्वागत किया है.

राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों से बजट सत्र में पारित इस विधेयक पर फिर से विचार करने के लिए कहा है.

राष्ट्रपति ने इस विधेयक को लौटाते हुए कहा है कि कौन से पद लाभ के पद की परिधि में नहीं आते हैं, इसे तय करते वक्त निष्पक्षता का ध्यान रखना चाहिए.

साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केंद्र सरकार द्वारा पारित यह विधेयक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके.

माना जाता है कि विधेयक के पारित होने से पहले जो पद लाभ के पद के दायरे में आते थे, उन्हें इस विधेयक की परिधि में लाए जाने पर भी राष्ट्रपति ने आपत्ति की है.

प्रतिक्रियाएं

राष्ट्रपति के क़दम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इससे यूपीए की ग़लत नीतियों का पर्दाफ़ाश हो गया है.

उन्होंने राष्ट्रपति के इस क़दम को उचित बताते हुए कहा, "राष्ट्रपति ने इस विधेयक के बारे में ऐसा फ़ैसला लेकर संविधान के संरक्षक की भूमिका निभाई है."

उधर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि विधेयक के वापिस होने के बाद सरकार की इस बारे में रणनीति क्या होगी, इसपर अभी कुछ कह पाना संभव नहीं है.

विवाद

केंद्र सरकार ने इसी महीने संसद के बजट सत्र में लाभ का पद संबंधी विधेयक संसद में पेश किया था जो दिनभर चली बहस के बाद ध्वनिमत से पारित हो गया था.

पारित विधेयक के अनुसार राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सहित क़रीब 45 पदों को लाभ के पद के दायरे से बाहर रखा गया था.

सदन में इस विधेयक का विरोध करते हुए भारतीय जनता पार्टी सहित कुछ अन्य विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया था. विपक्ष को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद को लाभ का पद न मानने पर आपत्ति थी.

उस वक्त केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा था कि यदि विधेयक पेश नहीं किया जाता तो क़रीब 40 संसद सदस्यों की सदस्यता जा सकती थी. उन्होंने कहा कि कई सदस्यों की सदस्यता जाने पर रिक्त जगहों पर फिर से चुनाव कराने होंगे जिससे देश पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ेगा.

ग़ौरतलब है कि लाभ के पद मामले पर पिछले कुछ समय के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद जया बच्चन को अपनी सदस्यता से हाथ धोना पड़ा था वहीं सोनिया गांधी ने इस आरोप के बाद अपनी संसद सदस्यता और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी पर भी इसके दायरे में होने के आरोप लगे थे जिसके बाद इसपर राजनीतिक बहस शुरू हो गई थी.