शनिवार, 27 मई, 2006 को 17:19 GMT तक के समाचार
भारत में सरकारी सहायता पाने वाले व्यावसायिक और उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण करने की सरकारी योजना का विरोध करने के लिए शनिवार को राजधानी दिल्ली में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने एक विशाल रैली निकाली.
ऐसी ख़बरें भी मिलीं कि एक प्रदर्शनकारी ने रैली में ही ख़ुद को आग लगाकर मारने की कोशिश की.
प्रदर्शनकारी डॉक्टर और मेडिकल छात्रों की यह रैली जब दिल्ली के रामलीला मैदान में पहुँची तो वहाँ रैली में ही मौजूद एक व्यक्ति ने ख़ुद के कपड़ों में आग लगा ली.
प्रदर्शनकारी छात्रों और वहाँ मौजूद पुलिस ने आग को तुरंत बुझा दिया. पुलिस फिर उस व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले गई. उसे ख़तरे से बाहर बताया गया है.
शनिवार की इस रैली का आयोजन आरक्षण का विरोध कर रहे डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के संगठन यूथ फ़ॉर इक्वैलिटी ने किया था. इस संगठन ने ख़ुद को आग लगाए जाने की इस घटना की निंदा की है.
यूथ फ़ॉर इक्वैलिटी संगठन ने कहा है कि उसकी योजना सरकारी योजना के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करने की है और कपड़ों में आग लगाने जैसी इस तरह की घटनाओं से उनके अभियान को नुक़सान ही होगा.
इस रैली में व्यापारी, शिक्षक और अन्य पेशों से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि अगर सरकारी योजना लागू होती है तो उच्च जातियों के छात्रों के लिए स्थान कम हो जाएंगे और इससे शिक्षा का स्तर भी कम होगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को हड़ताली छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की थी और कहा था कि उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण से हुई कमी की भरपाई के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी.
लेकिन प्रधानमंत्री का यह वादा हड़ताली छात्रों को शनिवार की रैली रद्द करने पर राज़ी नहीं कर सका. ये डॉक्टर और मेडिकल छात्र आरक्षण बढ़ाए जाने की योजना के विरोध में पिछले क़रीब एक पखवाड़े से हड़ताल कर रहे हैं जिससे अस्पतालों में सेवाओं पर असर पड़ा है.
देश के कुछ अन्य शहरों में भी आरक्षण विरोधी रैलियाँ और प्रदर्शन होने की ख़बरें हैं. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली.
प्रदर्शनकारियों की माँग है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में और आरक्षण न बढ़ाया जाए. कोलकाता में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो वे अपना आंदोलन और तेज़ करेंगे.
उनका कहना था कि व्यासायिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीट पाने के लिए योग्यता ही एकमात्र कसौटी होनी चाहिए.