शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 17:14 GMT तक के समाचार
नेपाल सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच तीन साल बाद शुक्रवार को पहली बार औपचारिक बातचीत हुई जिसमें संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के साथ ही उसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों से कराने पर सहमति हुई है.
दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत अप्रैल में हुए प्रदर्शनों के बाद राजा ज्ञानेंद्र की सत्ता राजनीतिक नेताओं को सौंपने की घोषणा के बाद संभव हुई.
सरकारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृहमंत्री कृष्ण प्रसाद सितौला ने किया और उनके प्रतिनिधिमंडल में दो अन्य मंत्री प्रदीप ग्यावली और रमेश लेखक थे.
माओवादियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उनके प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महारा ने किया और इस दल में महारा के अलावा दीनानाथ शर्मा और देव गुरुंग थे.
बातचीत राजधानी काठमाँडू के बाहर जंगल में एक होटल में हुई.
सितौला और महारा ने पहले दौर की यह बातचीत समाप्त होने के बाद पत्रकारों को बताया कि दोनों पक्ष 25 सूत्री एक आचार संहिता पर अमल करने पर समहत हुए हैं.
इस आचार संहिता में युद्ध विराम की अवधि बढ़ाया जाना और किसी भी तरफ़ से फौजी कार्रवाई नहीं करना शामिल होगा.
दोनों पक्षों में यह भी सहमति हुई है कि संघर्ष विराम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी कराई जाएगी लेकिन क्या यह निगरानी संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर होगी यह अभी स्पष्ट नहीं है.
इस आचार संहिता का एक बिंदू यह भी है कि माओवादी न तो और भर्ती करेंगे और न ही ज़बरदस्ती चंदा वसूल करेंगे.
दोनों पक्षों ने कहा कि इस बातचीत से आपसी विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी और जो मतभेद रहे हैं उन्हें भी दूर करने की दिशा में प्रगति हुई है.
सितौला और महारा ने यह भी कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई.
यह बातचीत प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और माओवादियों के नेता प्रचंड के बीच होने वाली अहम मुलाक़ात की तैयारी के तौर पर हुई है.
माओवादियों के प्रवक्ता कृष्ण महारा ने बातचीत में भाग लेने से पहले प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला से अनौपचारिक मुलाक़ात की.
माओवादियों ने माँग रखी थी कि बातचीत शुरू होने से पहले सभी विद्रोहियों को जेलों से रिहा किया जाए. सितौला ने पत्रकारों को बताया कि माओवादियों को रिहा करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है.