शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 11:26 GMT तक के समाचार
अनीश अहलूवालिया
बीबीसी संवाददाता
ग्रामीण रोज़गार क़ानून को भारत में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कांग्रेस ने पार्टी ज़िलाध्यक्षों का एक सम्मेलन दिल्ली में आयोजित किया.
इसे भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संबोधित किया.
प्रधानमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी योजना को तेज़ी से लागू करने की कटिबद्धता दोहराई.
मनमोहन सिंह ने सम्मेलन में बोलते हुए कहा सरकार अपने वादे पर खरी उतरी है.
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस ज़िलाध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि ज़रूरतमंद लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना को राजनीति से बाहर रखना चाहिए.
सम्मेलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 200 से अधिक ज़िलाध्यक्षों के साथ चर्चा करके एक रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपेंगे.
ग्रामीण रोज़गार योजना को लागू करने के लिए कानून बनाने को कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती रही है.
यह योजना देश में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा ही है. इसके तहत हर ग्रामिण परिवार को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गारी देने की गारंटी सरकार दे रही है.
योजना को देश भर में प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपने ज़िलाध्यक्षों का सम्मेलन दिल्ली में आयोजित किया.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सम्मेलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के भाषण सुनते हुए लग सकता है कि सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि लोगों तक संदेश पहुँचाया जाए कि ये योजना कांग्रेस के कारण संभव हो पाई है.
वहीं पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि योजना को जिस प्रकार लागू किया जा रहा है वो पूरी तरह न्यायसंगत नहीं है.
सम्मेलन में भाग ले रहे ज़िलाध्यक्षों ने ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना में धांधलियों की मिसाल देते हुए निशान पर रखा ग़ैर कांग्रेसी सरकारों को.
उनका कहना था उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में सरकारें इसे लेकर गंभीर नहीं है और धांधलियाँ हो रही हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर दलगत राजनीति को एक तरफ़ रख दिया जाए तो ज़ाहिर है कि योजना को लागू करने की प्रतिबद्धता और उस पर ईमानदारी से अमल करने के बीच अंतर को ख़त्म किए बिना वो सफल नहीं हो सकती.