बुधवार, 24 मई, 2006 को 07:33 GMT तक के समाचार
भारत का कहना है कि सियाचिन क्षेत्र में तैनात सैनिकों की तादाद कम करने के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई.
दिल्ली में दो दिन चली इस वार्ता में दोनों देश किसी सहमति पर नहीं पहुँच सके.
रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में उम्मीद जताई कि इस बारे में दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है कि सियाचिन क्षेत्र से सेनाएं हटाने से पहले दोनों देश वहाँ पर अपनी-अपनी सामरिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए एक समझौते पर हस्ताक्षर करें. दोनों देशों के बीच गतिरोध की यही वजह है."
हालांकि पाकिस्तान के रक्षा सचिव तारिक़ वसीम ग़ाज़ी ने दिल्ली पहुँचने के बाद कहा था कि वो इस विवाद को सुलझाने के लिए खुले दिमाग से आए हैं.
भारत ने भी इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की उम्मीद जताई थी.
पृष्ठभूमि
दोनों देशों के बीच अपनी-अपनी सामरिक स्थितियों को लेकर गतिरोध बना रहा जिसके कारण दुनिया के इस सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र पर 10वीं बार भी कोई सहमति नहीं बन पाई.
दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर अब तक नौ दौर की बातचीत हो चुकी है.
इसके पहले दोनों देशों के अधिकारियों की पाकिस्तान के शहर रावलपिंडी में बातचीत हुई थी.
कश्मीर क्षेत्र में स्थित इस ग्लैशियर पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद काफ़ी पुराना है.
सियाचिन दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है जो समुद्र तल से क़रीब 5500 मीटर की ऊँचाई पर है.
पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने 1984 में उस स्थान पर अपनी सैनिक मौजूदगी बढ़ा ली थी जिसे पाकिस्तान अपना क्षेत्र बताता है.
लेकिन भारत ने इस आरोप को ग़लत क़रार दिया था और पाकिस्तान ने भी जब अपने सैनिक वहाँ तैनात कर दिए तो छोटे स्तर पर संघर्ष शुरू हो गया था.
दोनों देशों के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि 20 साल से जारी इस संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से ज़्यादातर मौतें सियाचिन के ख़राब मौसम की वजह से हुईं.