बुधवार, 24 मई, 2006 को 21:54 GMT तक के समाचार
राजस्थान सरकार ने राज्य में विवाह के पंजीकरण को आवश्यक कर दिया है.
राज्य सरकार ने ये क़दम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया है जिसमें कहा गया था कि राज्य और केंद्र की सरकारें विवाह पंजीकरण को आवश्यक बनाने के लिए क़ानून बनाएँ.
महिला संगठनों ने इस क़दम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे राज्य में बाल विवाह रोकने में सहायता मिलेगी.
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में कम उम्र में विवाह, एक बड़ी समस्या है.
भाजपा शासित राजस्थान के सामाजिक कल्याण मंत्री मदन दिलावर ने कहा है कि अब बिना पंजीकरण के किसी विवाह की अनुमति नहीं दी जाएगी.
उन्होंने बताया कि पंजीकरण के लिए मामूली सा शुल्क भी लिया जाएगा.
सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव ने इस क़ानून का स्वागत करते हुए कहा, "राजस्थान में लड़कियों की कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है और 17 प्रतिशत लड़कियाँ 15 से 17 वर्ष की उम्र में ही माँ बन जाती हैं."
क़ानून के अनुसार लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले और लड़कों की शादी 21 साल से पहले नहीं की जानी चाहिए.
गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में पहले से ही विवाह का पंजीकरण करवाने का क़ानून है.
लेकिन भारत के ज़्यादातर हिस्सों में विवाह अभी भी पारंपरिक रीति रिवाज़ों के अनुसार होते हैं और जब तक वीसा लेने जैसी औपचारिकताएँ पूरी न करनी हो, कोई विवाह का पंजीकरण नहीं करवाता.