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बुधवार, 24 मई, 2006 को 02:58 GMT तक के समाचार

हिंसा के बीच कश्मीर में गोलमेज़ सम्मेलन

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कश्मीर मसले पर गोलमेज़ सम्मेलन शुरू हो गया है. लेकिन श्रीनगर में हिंसा की घटनाएँ भी हुई हैं.

गोलमेज़ सम्मेलन शुरू होने से पहले श्रीनगर में चरमपंथियों ने ग्रेनेड से हमला किया है.

इसमें चार लोग घायल हो गए हैं. हालांकि पिछले कुछ दिनों के चरमपंथी हमलों को देखते हुए वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रीनगर पहुँचने के बाद पहले संयुक्त कमान की बैठक की.

इधर हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े और कई अलगाववादी संगठनों ने सम्मेलन के विरोध में बंद आयोजित किया है.

सम्मेलन में जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था, आर्थिक विकास, मानवाधिकार और नियंत्रण रेखा के पार यात्रा और व्यापार करने पर चर्चा होने की उम्मीद है.

दो दिवसीय इस सम्मेलन में हुर्रियत कॉफ़्रेंस के उदारवादी और कट्टरपंथी- दोनों धड़ों ने हिस्सा न लेने का फ़ैसला किया है. साथ ही भाजपा ने भी इसमें भाग लेने से मना कर दिया है.

हालाँकि हुर्रियत के उदारवादी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा था कि सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री उनसे मिलना चाहें, तो उन्हें आपत्ति नहीं है.

लेकिन समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने बताया कि प्रधानमंत्री अलग से किसी से नहीं मिलेंगे.

उनका कहना था,'' जब प्रधानमंत्री सम्मेलन में सब ग्रुपों और राजनीतिक दलों से मिलने के इच्छुक हैं तो उनके किसी से अलग से मिलने की ज़रूरत नहीं है.''

भाजपा का कहना है कि सरकार कश्मीर में सुरक्षा चिंताओं की अनदेखी कर रही है और अलगाववादी गुटों को ख़ुश करने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने इसी कारण गोलमेज़ सम्मेलन में शामिल न होने का फ़ैसला किया है.

भाजपा ने कश्मीर मसले पर दिल्ली में हुए पहले गोलमेज़ सम्मेलन में हिस्सा लिया था. यह सम्मेलन इसी साल फरवरी में हुआ था.

हुर्रियत के कट्टरपंथी गीलानी गुट ने पहले ही सम्मेलन में आने से मना कर दिया था.

कड़ी सुरक्षा

सम्मेलन को देखते हुए जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

एक सरकारी आदेश के तहत अगले दो दिनों तक किसी भी सार्वजनिक रैली के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

गोलमेज सम्मेलन के ठीक तीन दिन पूर्व रविवार को श्रीनगर में कांग्रेस की रैली में हुए चरमपंथी हमले को बातचीत के रास्ते में रुकावट पैदा करने की कोशिश के रुप में देखा जा रहा है.

इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई थी और 25 अन्य घायल हो गए थे.

हालांकि मनमोहन सिंह ने साफ़ किया है कि चरमपंथी हमलों से राज्य में शांति बहाली के उपाय नहीं रुकेंगे.

सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा गृह मंत्री शिवराज पाटिल,राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन, केंद्र के वार्ताकार एनएन वोहरा, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टीकेए नायर और गृह सचिव वीके दुग्गल हिस्सा लेंगे.