मंगलवार, 23 मई, 2006 को 03:10 GMT तक के समाचार
सियाचिन क्षेत्र में सैनिकों की मौजूदगी के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तरीय बातचीत बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहेगी.
हालांकि मंगलवार को बातचीत के दौरान किन सवालों पर बहस हुई और सहमति बनी, यह पूछने पर दिल्ली में अधिकारियों ने कहा कि बुधवार को बातचीत ख़त्म होने के बाद ही कोई बयान जारी किया जाएगा.
इसके पहले दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर नौ दौर की बातचीत हो चुकी है.
लेकिन अभी तक दोनों देशों के बीच दुनिया के इस सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र में अपनी सैनिक मौजूदगी कम करने पर कोई सहमति नहीं हो पाई है.
पाकिस्तान के रक्षा सचिव तारिक़ वसीम ग़ाज़ी ने दिल्ली पहुँचने के बाद कहा कि वो इस विवाद को सुलझाने के लिए खुले दिमाग से आए हैं.
इधर भारत ने इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की उम्मीद जताई है.
इसके पहले दोनों देशों के अधिकारियों की पाकिस्तान के शहर रावलपिंडी में बातचीत हुई थी.
विवाद
कश्मीर क्षेत्र में स्थित इस ग्लैशियर पर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद काफ़ी पुराना है.
सियाचिन दुनिया का सबसे ऊँचा युद्ध क्षेत्र है जो समुद्र तल से क़रीब 5500 मीटर की ऊँचाई पर है.
पाकिस्तान का आरोप है कि भारत ने 1984 में उस स्थान पर अपनी सैनिक मौजूदगी बढ़ा ली थी जिसे पाकिस्तान अपना क्षेत्र बताता है.
लेकिन भारत ने इस आरोप को ग़लत क़रार दिया था और पाकिस्तान ने भी जब अपने सैनिक वहाँ तैनात कर दिए तो छोटे स्तर पर संघर्ष शुरू हो गया था.
दोनों देशों के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि 20 साल से जारी इस संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से ज़्यादातर मौतें सियाचिन के ख़राब मौसम की वजह से हुईं.
पाकिस्तानी का कहना है कि 1989 में यह सहमति हुई थी कि भारत अपनी पुरानी स्थिति पर वापिस लौट जाएगा लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ और एक अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई.
पाकिस्तान ज़ोर देता रहा है कि 1989 के समझौते को लागू किया जाए और दोनों देशों की सेना 1984 से पहले की स्थिति पर वापस लौटें.