मंगलवार, 23 मई, 2006 को 18:37 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने फ़ैसला लिया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के छात्रों को 27 प्रतिशत आरक्षण अगले साल जून से दिया जाएगा.
यूपीए की समन्वय समिति और वामपंथी दलों की बैठक के बाद सरकार ने घोषणा की है कि इसके लिए संसद के मानसून सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा.
साथ ही सरकार ने एक समिति बनाने का फ़ैसला किया है जो आरक्षण के दायरे में न आने वाले अन्य वर्गों के हितों पर विचार करेगी और सीटें बढ़ाने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाएगी.
इस समिति की रिपोर्ट अगस्त 2006 तक आ जाएगी.
उल्लेखनीय है कि सरकार ने जब से केंद्र सरकार की मदद से चलने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का फ़ैसला किया है तब से इसका विरोध भी शुरु हो गया है.
दिल्ली और कई शहरों के मेडिकल छात्र पिछले दस दिनों से हड़ताल पर हैं और दूसरे संस्थानों के छात्रों ने भी उन्हें कई जगह समर्थन दिया है.
संवैधानिक ज़रुरत
लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दिसंबर 2005 में हुई 93वें संविधान संशोधन के बाद पिछड़े वर्गों को आरक्षण देना एक संवैधानिक ज़रुरत है और सरकार अपनी इस ज़िम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगी.
दिल्ली में मंगलवार को देर शाम हुई यूपीए समन्वय समिति की बैठक के बाद रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, "एक बार संसद से विधेयक पारित होने के बाद केंद्र के तहत आने वाले उच्च शिक्षा केंद्रों में अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण जून 2007 से शुरु होने वाले सत्र से शुरु हो जाएगा."
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा लेने के इच्छुक दूसरे छात्रों की हितरक्षा पर विचार करने के लिए सरकार एक समिति का गठन करेगी.
प्रणव मुखर्जी ने बताया, "केंद्रीय समिति इन शिक्षण संस्थानों में सीटें बढ़ाने के लिए एक समयबद्ध रोडमैप तैयार करेगी."
उन्होंने बताया कि हर शिक्षण संस्थान की कार्ययोजना बनाने के लिए डीन, निदेशकों और उपकुलपति की छोटी समितियाँ बनाई जाएँगीं. ये छोटी समितियाँ अपनी अनुशंसा केंद्रीय समिति को भेजे देगी.
केंद्रीय समिति अगस्त 2006 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी.