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मंगलवार, 23 मई, 2006 को 19:46 GMT तक के समाचार

अनीश अहलूवालिया
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

पोप के बयान पर भारत को आपत्ति

भारत के कुछ राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए बनाए जा रहे क़ानूनों की इसाई कैथोलिक धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताई है.

पोप के बयान पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी आपत्ति जताई थी.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह पोप बेनेडिक्ट ने कहा था कि भारत के कुछ राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए निंदनीय कानून बनाए जा रहे हैं और यह अपना धर्म चुनने के लोगों के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ है.

धर्मांतरण क़ानून का नया मामला राजस्थान से उभरा है जहाँ राज्यपाल ने विधेयक को सरकार को पिछले हफ़्ते वापस भेज दिया था.

भारत के उपविदेशमंत्री आनंद शर्मा ने इसाई कैथोलिक धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट की टिप्पणियों पर भारत की प्रतिक्रिया की जानकारी देते हुए राज्य सभा में कहा कि विदेश मंत्रालय ने सोमवार को दिल्ली में वैटिकन के दूत को बुला कर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार पोप की टिप्पणियों नाराज़ है.

राज्य सभा में भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने सवाल किए थे कि भारत पोप की टिप्पणियों पर चार दिनों तक चुप क्यों रहा.

दरअसल 18 मई को जब वैटिकन में भारत के नए राजदूत अमिताव त्रिपाठी ने पोप बेनेडिक्ट को अपने परिचय दस्तावेज़ सौंपे थे तब पोप ने उनसे कहा था कि वो भारत के कुछ क्षेत्रों में धार्मिक असहिष्णुता से चिंतित हैं.

उन्होंने कहा था कि भारत के कुछ राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए बनाए गए का़नून लोगों को अपना धर्म चुनने की स्वतंत्रता के अधिकार के ख़िलाफ़ है और ये प्रयास निंदनीय हैं.

ग़ौरतलब है कि इस वक्तव्य के दूसरे दिन यानी 19 तारीख़ को भारतीय विदेशमंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में मात्र इतना कहा था कि सभी जानते हैं कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहां सभी धर्म के लोगों को समान अधिकार प्राप्त हैं.

अब उप विदेशमंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि वैटिकन को कल उचित और स्पष्ट जवाब दिया गया है.

भाजपा भी नाराज़

उधर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी पोप बेनेडिक्ट को पत्र लिख कर कहा था कि कोई देश अपने इलाकों के लोगों के धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता.

जब राजनाथ सिंह से जब बीबीसी ने इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि जिन राज्यों में धर्मांतरण संबंधी कानून लाए जा रहे हैं वो संविधान के अनुसार ही हैं.

भाजपा ने हमेशा धर्मांतरण को लेकर नाराज़गी जताई है और इस पर रोक लगाने की बात करती रही है.

पिछले ही हफ़्ते राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा विधानसभा में धर्मांतरण संबंधी विधेयक पर हस्ताक्षर करने से राज्यपाल ने इनकार कर दिया था और इसे राष्ट्रपति को भेजने की सिफ़ारिश की थी.