शनिवार, 20 मई, 2006 को 16:40 GMT तक के समाचार
भारत प्रशासित कश्मीर में पृथकतावादी सर्वदलीय हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी माने जाने वाले धड़े ने अगले सप्ताह श्रीनगर में होने वाली बातचीत में भाग लेने का भारत सरकार का न्यौता ठुकरा दिया है.
इस राउंड टेबल कान्फ्रेंस का आयोजन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया है और इसमें भाग लेने के लिए भारत समर्थक और विरोधी पार्टियों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है.
यह राउंड टेबल सम्मेलन श्रीनगर में 24 और 25 मई को होना है और इस दिन हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े ने हड़ताल का आहवान किया है.
हालाँकि हुर्रियत कान्फ्रेंस के उदारवादी धड़े ने भी इस राउंड टेबल में भाग लेने के बारे में अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया है. इस धड़े का नेतृत्व मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ करते हैं और यह धड़ा प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली में हुई बातचीत में हिस्सा ले चुका है.
हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के चेयरमैन सैयद अली शाह गीलानी ने शनिवार को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में भारत सरकार कश्मीर मसले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए गंभीर नहीं है.
उन्होंने कहा, "यह राउंड टेबल कान्फ्रेंस कश्मीर में भारतीय शासन को वैधता दिलाने और नियंत्रण रेखा को स्थाई अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदलने का एक हथकंडा है."
गीलानी को इस राउंड टेबल में भाग लेने का औपचारिक न्यौता शनिवार को सुबह मिला.
गीलानी ने कश्मीर समस्या के समाधान के रूप में स्वशासन के प्रस्ताव को भी यह कहते हुए नामंज़ूर कर दिया कि असल मुद्दा संप्रभुता का है.
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार कश्मीरी पृथकतावादी नेताओं को सत्ता का लालच देकर चुनावी राजनीति में लाना चाहती है.
भारत सरकार के साथ बातचीत में शामिल होने से इनकार करते हुए गीलानी ने कहा, "तब तक बातचीत में शामिल होने का कोई मतलब नहीं जब तक कि भारत सरकार कश्मीर को अभिन्न अंग बताती है."
सैयद अली शाह गीलानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की देखरेख में जनमतसंग्रह कराया जाना कश्मीर समस्या का सबसे अच्छा और शांतिपूर्ण समाधान हो सकता है.
उन्होंने कहा कि शांति प्रक्रिया में तीनों पक्षों - भारत, पाकिस्तान और कश्मीर लोगों को शामिल किया जाना ज़रूरी है.