बुधवार, 17 मई, 2006 को 15:25 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आरक्षण के मुद्दे पर विचार करने के लिए चार सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया है.
इस समिति में वित्तमंत्री पी चिदंबरम, रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी, कानूनमंत्री हंसराज भारद्वाज और मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह हैं.
ग़ौरतलब है कि इस मुद्दे पर तनाव बढ़ रहा है और अनेक स्थानों पर हड़ताल और विरोध हो रहा है. आरक्षण के समर्थन और विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं.
अर्जुन सिंह ने आंदोलन कर रहे छात्रों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा कि सरकार उनका समाधान करने की कोशिश करेगी लेकिन यह भी दोहराया कि आरक्षण लागू करने की प्रतिबद्धता से सरकार पीछे नहीं हटेगी.
उधर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में छात्रों की भूख हड़ताल का बुधवार को चौथा दिन था और यहाँ छात्र नेताओं का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सीटें बढ़ाने भर से समस्या का समाधान नहीं होगा.
हड़ताली छात्रों ने केंद्रीय युवा और खेल मामलों के मंत्री ऑस्कर फ़र्नांडीस से भी बुधवार को मुलाक़ात की. मंत्री ने इस मुलाक़ात को इस समस्या के समाधान की दिशा में एक शुरुआती क़दम बताया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ऑस्कर फ़र्नांडीस ने कहा, "हमने उनकी बात धैर्य से सुनी. हम फिर मुलाक़ात करेंगे और देखेंगे कि क्या रास्ता निकल सकता है."
उधर यूथ फ़ॉर इक्वैलिटी के बैनर तले हड़ताली डॉक्टरों ने तीन सूत्रीय एक ज्ञापन फ़र्नांडीस को सौंपा जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पहले से मौजूद आरक्षण को वापस लिए जाने की उनकी मुख्य माँग भी शामिल है.
एम्स में जहां आरक्षण विरोधी छात्र और डॉक्टर धरना दे रहे हैं वहीं आरक्षण का समर्थन करने वाले संगठन जस्टिस पार्टी के कुछ लोगों के बुधवार दोपहर वहाँ पहुंचने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी.
हालाँकि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई.
पंजाब, हरियाणा, गोवा के साथ-साथ अब पश्चिम बंगाल के डाक्टरों ने भी अभियान छेड़ने का फ़ैसला है.
देखने में यह भी आ रहा है कि इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों के उच्च शिक्षा संस्थानों से आरक्षण विरोधी गुट उतनी आक्रामकता के साथ आंदोलन छेड़ते नहीं दिख रहे जैसा कि चिकित्सा संस्थानों में देखा जा रहा है.
'ग़लत है विरोध'
ग़ौरतलब है कि तमिलनाड़ु जैसे राज्य, जहाँ अन्य पिछड़ी जातियों के लोगों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज़्यादा है, वहाँ डॉक्टरों और चिकित्सा छात्रों के संगठनों ने आरक्षण के पक्ष में प्रदर्शन किए हैं.
इन संगठनों ने उत्तरी भारत के छात्र संगठनों पर आरक्षण के मुद्दे पर ग़लत प्रचार करने के आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कहना ग़लत होगा कि आरक्षण की वजह से चिकत्सा क्षेत्र का स्तर गिरेगा.
इन संगठनों का कहना है कि तमिलना़डु की स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सकों का काम और योगदान इसका एक उदाहरण है जहाँ आरक्षण से गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं आया है.
केंद्र सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि वो इस मुद्दे पर कोई सामाजिक टकराव नहीं चाहती.
इस बीच पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का समर्थन करने वाले नेताओं में शामिल शरद यादव, लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान स्पष्ट कर चुके हैं कि वे उच्च वर्ग के लोगों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान करने के पक्ष में हैं.
उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किए जाने के प्रस्ताव का छात्र विरोध कर रहे हैं.
गत 12 मई को मेडिकल छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस से उनकी झड़प के बाद 13 मई से छात्र हड़ताल पर हैं और धीरे-धीरे ये हड़ताल देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गई है.
उधर मंगलवार को कुछ आरक्षण समर्थक गतिविधियाँ भी दिखाई दीं लेकिन विरोध की तुलना में यह काफ़ी कम थीं.