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मंगलवार, 16 मई, 2006 को 15:17 GMT तक के समाचार

नगेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

'आरक्षण का फ़ैसला नहीं बदलेगा'

शिक्षा संस्थानों में आरक्षण को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने कहा है कि वह सभी वर्गों को मनाने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने सहित सभी विकल्पों पर विचार कर रही है.

लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि आरक्षण का फ़ैसला वापस नहीं लिया जाएगा. इस बीच उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है.

मंगलवार को संसद में भी आरक्षण मुद्दे की गूँज रही. इस मुद्दे पर सरकार का रुख़ स्पष्ट करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि सरकार इससे अनजान नहीं कि छात्रों का एक तबका ये महसूस रहा है कि उनसे कुछ छीना जा रहा है.

उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे पर खुले मन से विचार कर रहे हैं. हम सभी विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार हैं. इसमें सीटों की संख्या बढ़ाना भी शामिल है."

लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस फ़ैसले से पीछे हटने का सवाल ही नहीं पैदा होता. अर्जुन सिंह ने कहा कि इस संबंध में विधेयक पिछले साल दिसंबर में ही पारित हो चुका है और इसे वापस नहीं लिया जा सकता.

इस बीच आरक्षण के फ़ैसले के ख़िलाफ़ मेडिकल कॉलेज के छात्रों और जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है.

विरोध और समर्थन में प्रदर्शन

राजधानी नई दिल्ली सहित देश के कई शहरों में हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के साथ-साथ देश के कई शहरों में आरक्षण के समर्थन में भी रैलियाँ निकालीं गईं.

दिल्ली सरकार ने हड़ताली डॉक्टरों को चेतावनी दी है कि वे काम पर लौट आएँ अन्यथा उनका वेतन काट लिया जाएगा. लेकिन डॉक्टरों की ओर से हड़ताल ख़त्म करने का कोई संकेत नहीं मिल रहा.

डॉक्टरों के एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अर्जुन सिंह की कथनी पर भरोसा नहीं.

उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उन्हें बातचीत के लिए बुलाएँ और भरोसा दिलाएँ कि राजनीतिक कारणों से प्रतिभाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा.

दिल्ली के साथ-साथ चंडीगढ़, जयपुर, भोपाल, मुंबई, मेरठ और कई अन्य शहरों में डॉक्टर हड़ताल पर हैं. सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण पहले से ही लागू है.

लेकिन सरकार आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करना चाहती है. ऊँची जाति के छात्रों का कहना है कि आरक्षण के कारण प्रतिभाएँ प्रभावित होंगी और स्तर भी गिरेगा.