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सोमवार, 15 मई, 2006 को 19:50 GMT तक के समाचार

विधेयक का विरोध करने का फ़ैसला

राष्ट्रीय जनताँत्रिक गठबंधन( एनडीए) ने लाभ के पद के दायरे से 46 पदों को हटाने के लिए लाए जानेवाले विधेयक का विरोध करने का फ़ैसला किया है.

ग़ौरतलब है कि यूपीए सरकार मंगलवार को इस संबंध में एक विधेयक लाने पर विचार कर रही है.

इसके पहले सरकार ने फ़ैसला किया था कि लाभ के पद के मामले में संविधान संशोधन करने के बजाए मौजूदा क़ानून में ही कुछ उपबंध और जोड़ दिए जाएँ.

भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने एनडीए की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया,'' हमने सर्वसम्मति से इस विधेयक का विरोध करने का फ़ैसला किया है क्योंकि इसके बाद लाभ के पद संबंधी संविधान का अनुच्छेद 102 अर्थहीन हो जाएगा.''

उनका कहना था कि यह विधेयक सरकार को बचाने के लिए लाया जा रहा है और एनडीए इसका एक स्वर से विरोध करेगा.

सुषमा स्वराज ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि लाभ के पद संबंधी संविधान के अनुच्छेद 102 की दोबारा से व्याख्या हो और इसमें जो अस्पष्टता है, उसे दूर किया जाए.

आलोचना

इधर कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करने के लिए एनडीए की कड़ी आलोचना की है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है.

कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने कहा कि यदि विपक्ष को इसमें नैतिकता आड़े आ रही है तो उसे अपने शासित राज्यों में ऐसे विधेयक नहीं लाने चाहिए थे.

माना जा रहा है कि मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में इसे लेकर गहमागहमी रहेगी.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के जया बच्चन को राहत देने से इनकार कर देने से इस मामले को और गंभीर बना दिया है. जया बच्चन की राज्यसभा की सदस्यता लाभ के पद को लेकर ही ख़त्म की गई थी.

इसके बाद राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के पास कई दलों के अनेक मंत्रियों और सांसदों की शिकायतें पहुँच गईं कि वे लाभ के पदों पर हैं और साथ ही संसद के सदस्य भी हैं.