http://www.bbcchindi.com

बुधवार, 10 मई, 2006 को 11:13 GMT तक के समाचार

नेपाल में 'शाही ज़्यादतियों' की जाँच

नेपाल में अप्रैल में हुए राजा विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित शाही ज़्यादतियों की जल्दी ही उच्चस्तरीय जाँच शुरू की जाएगी.

ग़ौरतलब है कि राजा ज्ञानेंद्र के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हज़ारों लोगों ने कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हुए जुलूस निकाले थे और रैलियाँ की थीं और राजा की सरकार ने देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए थे. उन प्रदर्शनों के दौरान 14 लोगों की मौत हुई थी.

प्रदर्शनों के बाद राजा ने अपने सीधे नियंत्रण वाली सरकार के बदले एक नई सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया था जिसके बाद नेपाली कांग्रेस के नेता गिरिजा प्रसाद कोईराला के नेतृत्व में नई सरकार बनी थी.

नई सरकार ने घोषणा की थी कि एक संविधान सभा के गठन के लिए चुनाव कराए जाएंगे.

वह संविधान सभा ही देश के लिए नया संविधान तैयार करेगी जिसके आधार पर ही देश में राजतंत्र के भविष्य के बारे में फ़ैसला किया जाएगा.

नई सरकार ने राजा के शासन के दौरान हुई नियुक्तियाँ पहले ही रद्द कर दी हैं और बहुत से महत्वपूर्ण देशों से राजदूतों को भी वापस बुला लिया है इनमें वाशिंगटन, दिल्ली, लंदन, टोकियो और पेरिस भी शामिल हैं.

पृष्ठभूमि

अक्तूबर 2002 में राजा ज्ञानेंद्र ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा की सरकार को बर्ख़ास्त करके अपने ख़ुद के मंत्री नियुक्त कर दिए थे.

फ़रवरी 2005 में राजा ने सरकार को बर्ख़ास्त करके यह कहते हुए सत्ता सीधे अपने हाथों में ले ली थी कि नेता लोग भ्रष्ट हो गए हैं और देश में माओवादी विद्रोही गतिविधियों से निपटने में नाकाम रहे हैं.

लेकिन गत अप्रैल में जब हज़ारों लोग राजा का विरोध करते हुए सीधे सड़कों पर उतर आए तो राजा को अपना सीधा शासन समाप्त करना पड़ा और तब एक नई सरकार का गठन हुआ.

राजा ज्ञानेंद्र ने मई 2002 में जिस संसद को बर्ख़ास्त कर दिया था, उसे ही बहाल किया गया है.

नई सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम का एक समझौता भी हुआ है.