शनिवार, 06 मई, 2006 को 14:00 GMT तक के समाचार
भारत की राजधानी दिल्ली में बिजली संकट पर चर्चा करने के लिए हुई बैठक में दिल्ली सरकार ने शहर के शॉपिंग मॉल और उद्यौगिक ईकाइयाँ को रोज़ाना शाम साढ़े सात बजे बंद करने का अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है.
लेकिन बिजली संकट से निपटने के लिए कई अन्य क़दम उठाए गए हैं.
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री हारून युसूफ़ ने कहा कि नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे रात को नौ बजे से पहले अपने एयरकंडीशनर चालू न करें.
सरकारी दफ़्तरों में शाम साढ़े छह बजे के बाद एयरकंडीशनर का इस्तेमाल करने पर पाबंदी होगी.
इसके अलावा बिजली की बचत करने के लिए शहर में रात नौ बजे के बाद बिलबोर्ड नहीं जलाए जाएँगे.
दिल्ली सरकार ने पहले शाम को साढ़े सात बजे के बाद शॉपिंग मॉल बंद करने का प्रस्ताव रखा था लेकिन कई व्यापारियों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाकात कर ये प्रस्ताव वापस लेने का अनुरोध किया था. व्यापारियों का कहना था कि इससे व्यापार पर असर पड़ेगा.
इसके बाद ये प्रस्ताव वापस ले लिया गया.
बिजली की कमी
दिल्ली में रोज़ाना बिजली की जितनी ज़रूरत होती है, उसकी तुलना में दिल्ली के पास करीब 500 मेगावाट बिजली कम है. इस साल गर्मी में दिल्ली अपने सबसे भीषण बिजली संकटों में से एक से गुज़र रही है.
दिल्ली बिजली संकट पर शनिवार को केंद्रीय ऊर्जा सचिव आरवी शाही की अध्यक्षता में नौ उत्तरी राज्यों और केंद्र की आपात बैठ हुई थी.
बैठक में उत्तरी राज्यों के अधिकारियों ने ये भरोसा दिलाया कि वे उत्तरी ग्रिड से निर्धारित सीमा से ज़्यादा बिजली नहीं लेंगे.
उत्तरी ग्रिड से दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों को बिजली की आपूर्ति होती है.
इन उत्तरी राज्यों को आगाह भी किया गया है कि अगर उन्होंने निर्धारित सीमा से ज़्यादा बिजली ली तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बढ़ती माँग से निपटने के लिए दिल्ली को अन्य स्रोत्रों से करीब 200 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है लेकिन कुल माँग को पूरा कर पाना अब भी संभव नहीं है.
शनिवार को उठाए गए क़दमों से बिजली संकट थोड़ा कम हो सकता है लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक बिजली की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए सरकार को बिजली उत्पादन बढ़ाना होगा.
बिजली संकट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट इस महीने केंद्र सरकार और दिल्ली के अधिकारियों की दलील सुनेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चिंता जताते हुए कहा था कि बिजली की किल्लत को देखते हुए अधिकारी 2010 में राष्ट्रमंडल खेल आयोजित करने की योजना कैसे बना रहे हैं.