गुरुवार, 04 मई, 2006 को 13:11 GMT तक के समाचार
नेपाल में माओवादी विद्रोहियों ने सरकार के संघर्षविराम की घोषणा का स्वागत किया है. एक सप्ताह पहले ही माओवादियों ने भी संघर्षविराम की घोषणा की थी.
माओवादियों ने सरकार के क़दम का स्वागत करते हुए कहा है कि वे शांति वार्ता के लिए सरकार का निमंत्रण स्वीकार कर रहे हैं.
माओवादी नेता प्रचंड की ओर से जारी एक बयान में सरकार की अनिश्चितकालीन संघर्षविराम की घोषणा को एक सकारात्मक क़दम कहा गया है.
प्रचंड ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि इस बात शांति वार्ता नहीं टूटेगी." इससे पहले वर्ष 2001 और 2003 में शांति वार्ता टूट गई थी. 1996 से अभी तक नेपाल में हिंसा के कारण 13 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
काठमांडू से बीबीसी संवाददाता सुशील शर्मा का कहना है कि सरकार और माओवादियों के बीच बातचीत की तारीख़ और स्थान पर अभी फ़ैसला नहीं हुआ है.
भरोसा
माओवादी नेता प्रचंड ने बताया है कि सरकार के पास उन्होंने एक आचारसंहिता भेज दी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इसे ईमानदारी के साथ लागू करेगी. लेकिन उन्होंने इसका विवरण नहीं दिया.
प्रचंड ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत में संविधान सभा के लिए चुनाव का लक्ष्य रखा जाएगा, जो नया संविधान तैयार करेगी और राजशाही की भूमिका भी तय करेगी.
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद नेपाल नरेश ने संसद बहाल की. लेकिन संविधान सभा के प्रस्तावित चुनाव से पहले इस संसद को भंग करना पड़ेगा.
प्रचंड ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस बार बातचीत असफल नहीं रहेगी. पहले दो बार बातचीत नाकाम रही है लेकिन इस बार ऐतिहासिक मौक़ा है."
सरकार ने पहले ही नया संविधान तैयार करने के लिए चुनाव पर सहमति व्यक्त की है जो राजशाही का भविष्य भी तय करेगी.
पहले दो बार सरकार और माओवादियों के बीच बातचीत नाकाम रही है. लेकिन इस बार सात पार्टियों के गठबंधन और माओवादियों के बीच राजशाही के ख़िलाफ़ मिलकर काम करने पर सहमति हुई थी.
राजनेताओं ने भी वादा किया है कि वे माओवादियों के साथ मिलकर काम करेंगे और उन्हें सरकार में शामिल करने की भी कोशिश करेंगे.