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रविवार, 30 अप्रैल, 2006 को 11:32 GMT तक के समाचार

'एलटीटीई विद्रोहियों ने विरोधियों को मारा'

श्रीलंका में तमिल विद्रोही गुट एलटीटीई के विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने अपने ही गुट से अलग हुए कम से कम 10 लड़ाकों को पूर्वी श्रीलंका में हुई झड़प में मार दिया है.

एलटीटीई का कहना है कि उन्होंने एक अन्य विद्रोही नेता कर्नल करूणा की अगुआई वाले गुट के तीन ठिकानों पर हमला किया.

एलटीटीई के वरिष्ठ नेता एस पुलिथवन ने बीबीसी को बताया, "सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़े में करूणा गुट के ठिकानों पर हमला किया गया और ठिकानों को नष्ट कर दिया गया."

उन्होंने बताया, "ये ठिकाने राजधानी कोलंबो से करीब 250 किलोमीटर दूर है और वहाँ से जाने से पहले हमने ठिकानों को आग लगा दी."

श्रीलंका में सैनिक अधिकारियों ने बताया है कि इस झड़प में एलटीटीई के भी 10 लोग मारे गए लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

श्रीलंकाई सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडर प्रसाद समरसिंघे ने इस बात का खंडन किया कि झड़पें सरकारी नियंत्रण वाले इलाक़े में हुई. उन्होंने कहा कि झड़पें एलटीटीई के नियंत्रण वाले जंगलों में हुई.

संघर्षविराम

कर्नल करुणा को एलटीटीई में वी प्रभाकरण के बाद दूसरे नंबर पर माना जाता था और वे अपने हज़ारों समर्थकों के साथ वर्ष 2004 में एलटीटीई से अलग हो गए थे. वे सरकारी नियंत्रण वाले इलाक़े से अपनी गतिविधियाँ चलाते हैं.

एलटीटीई श्रीलंकाई सेना पर आरोप लगाती रही है कि वो करूणा गुट को समर्थन देती है. लेकिन सेना इस आरोप से इनकार करती रही है.

एलटीटीआई का समर्थन करने वाली वेबसाइट तमिलनेट डॉट कॉम के मुताबिक श्रीलंकाई सेना ने एलटीटीई के लड़ाकों पर हथगोले फेके लेकिन सरकार ने इस बात से इनकार किया है.

इन झड़पों के चलते श्रीलंका में जारी संघर्षविराम और भी दबाव में आ गया है.

कुछ दिन पहले तमिल विद्रोहियों ने श्रीलंका के कोलंबो शहर में सेना मुख्यालय पर आत्मघाती हमला किया था जिसके बाद श्रीलंकाई सेना ने तमिल विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े पर बमबारी की थी.

एलटीटीई की माँग है कि युद्धविराम पर आगे की बातचीत से पहले करूणा गुट के लोगों से हथियार डालने को कहा जाए.

पर्यवेक्षक श्रीलंका में युद्धविराम को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

1983 के बाद से एलटीटीई और श्रीलंका सरकार के बीच झड़पों में करीब साठ हज़ार श्रीलंकाई लोग मारे जा चुके हैं.