रविवार, 30 अप्रैल, 2006 को 06:27 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, काठमाँडू से
नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने पुनर्गठित संसद को अपने पहले संबोधन में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से हिंसा का त्याग करके बातचीत के लिए आगे आने का आह्वान किया है.
उन्होंने ने संसद से अपील की कि नई संविधान सभा के बारे में प्रस्ताव आज ही पारित कर दिया जाए.
संसद के अधिवेशन के दूसरे दिन अपने भाषण में कोइराला ने सबसे पहले नेपाल की जनता का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह संसद उनके ऐतिहासिक जनांदोलन के कारण ही फिर से अस्तित्व में आई है.
उन्होंने संसद के पुनर्गठन को एक नया कीर्तिमान और महान उपलब्धि बताया है.
कोइराला ने आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी.
उन्होंने कहा कि सात राजनीतित दलों और माओवादियों के बीच जो 12 सूत्री समझौता हुआ है उसे पूरा करना उनका दायित्व है.
उन्होंने शांति स्थापित करने और प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को पुनर्व्यवस्थित करने और आर्थिक पुनर्रचना के लिए समस्त वर्गों को एकजुट रखने का आह्वान किया.
शपथ ग्रहण
नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र ने गिरिजा प्रसाद कोइराला को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई है. राजमहल में हुए समारोह में कोइराला ने राज परिषद की सदस्यता नहीं ली.
कोइराला अस्वस्थ चल रहे हैं, इसलिए इस शपथ ग्रहण समारोह के मौक़े पर उनके साथ चिकित्सकों का एक दल भी था.
गिरिजा प्रसाद कोइराला ने प्रधानमंत्री पद की शपथ तो ली, लेकिन राज परिषद की सदस्यता नहीं ग्रहण की.
उल्लेखनीय है कि राज परिषद को एक समानांतर सत्ता व्यवस्था माना जाता है और प्रधानमंत्री समेत पूरा मंत्रिमंडल इसाक सदस्य होता है.
नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता कृष्ण प्रसाद सितोला ने गिरिजा प्रसाद कोइराला के राज परिषद की सदस्यता ग्रहण नहीं करने को एक अभूतपूर्व क़दम बताया है.
उन्होंने कहा, "संसद की संप्रभुता बरक़रार रखने के लए राज परिषद को ख़त्म किया जाना चाहिए."
कार्यकर्ताओं की माँग
नेपाल में राजनीतिक कार्यकर्ताओं का एक तबका यह माँग कर रहा था कि लोकतंत्र की स्थापना की शर्तों के तहत प्रधानमंत्री राजदरबार के बजाय किसी अन्य स्थान पर शपथ ग्रहण करें. लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका.
इन हालात को देखते हुए कोइराला ने भी अनुरोध किया था कि नेपाल नरेश की सलाहकारी परिषद यानी राज परिषद के अध्यक्ष को शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होने दिया जाए.
हालाँकि राज परिषद के अध्यक्ष परसु नारायण चौधरी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए, लेकिन कोइराला ने उनसे बातचीत नहीं की.
वास्तव में कोइराला ने शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद मुख्य न्यायाधीश या शासन के किसी अन्य शीर्ष अधिकारी से भी बात नहीं की.