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शुक्रवार, 28 अप्रैल, 2006 को 18:23 GMT तक के समाचार

प्रधानमंत्री से हुर्रियत की चर्चा तीन मई को

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ़्रेंस के नेताओं को बातचीत के लिए एक बार फिर आमंत्रित किया है.

दिल्ली में ये बातचीत तीन मई को होगी.

हुर्रियत के उदारवादी धड़े ने इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया है.

सरकार की ओर से कहा गया है कि यह यूपीए सरकार की जम्मू कश्मीर के अलगाववादी और चमरपंथी गुटों से चर्चा करने की नीति की अगली कड़ी है.

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह 25 मई को श्रीनगर में होने वाले गोलमेज़ सम्मेलन की तैयारी है और तीन मई की बैठक में हुर्रियत को इसके लिए राज़ी किया जाएगा.

इससे पहले दिल्ली में 25 फ़रवरी को जम्मू कश्मीर पर हुए पहले गोलमेज़ सम्मेलन में भाग लेने से हुर्रियत ने इंकार कर दिया था.

समझा जाता है कि हुर्रियत नेता इस बात से नाराज़ थे कि सरकार अलगाववादी नेताओं सज्जाद लोन और यासिन मलिक से भी चर्चा कर रही है.

हालांकि अब तक की ख़बरों के मुताबिक़ दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में भाग लेने के लिए न तो हुर्रियत का उदारवादी धड़ा तैयार है, न कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह जिलानी और न जेकेएलएफ़ के नेता यासिन मलिक.

बैठक

हुर्रियत नेताओं की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पहली मुलाक़ात पिछले साल सितंबर में हुई थी.

श्रीनगर में बीबीसी से हुई चर्चा में हुर्रियत के प्रमुख उमर फ़ारुक़ ने कहा है कि वे तीन मई की बैठक में भाग लेंगे और सरकार को सुझाव देंगे कि कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए किस तरह बढ़ना चाहिए.

उनका कहना था कि वे प्रधानमंत्री को ये भी बताएँगे कि वे कश्मीर मसले के हल के लिए हो रहे प्रयासों की सुस्त रफ़्तार से नाख़ुश हैं.

बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन ने ख़बर दी है कि हुर्रियत के उदारवादी धड़े के इस नेता ने तीन मई से पहले कार्यकारिणी और आम परिषद की बैठकें बुलाई हैं जिसमें तीन मई की बैठक के बारे में चर्चा की जाएगी.