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बुधवार, 26 अप्रैल, 2006 को 22:55 GMT तक के समाचार

माओवादियों ने किया संघर्षविराम

नेपाल के राजा ज्ञानेद्र की संसद को बहाल करने और सत्ता जनता को सौंपने की घोषणा के बाद माओवादी विद्रोहियों ने तीन महीने के संघर्षविराम की घोषणा की है.

साथ ही उन्होंने काठमांडू और दूसरे शहरों के रास्तों से बाधाएँ हटानी शुरु कर दी थीं.

इससे पहले माओवादी विद्रोहियों ने राजा ज्ञानेंद्र की घोषणा पर विश्वास करने से इनकार करते हुए कहा था कि वे शुक्रवार को संसद के खुलने का इंतज़ार करेंगे.

सात राजनीतिक दलों की ओर से प्रधानमंत्री चुने गए गिरिजा प्रसाद कोइराला ने माओवादियों से सहयोग की अपील की थी.

उल्लेखनीय है कि चार साल पहले राजा ज्ञानेंद्र ने संसद भंग करके सत्ता अपने हाथ में ले ली थी और तब से अब तक संसद की बैठक ही नहीं हुई.

संविधान

नेपाल में विगत दस वर्षों से संघर्षरत माओवादी विद्रोहियों ने तीन महीने के संघर्ष विराम की घोषणा के साथ दोहराया है कि संविधान को फिर से लिखे जाने का काम जल्दी शुरु होना चाहिए.

इससे पहले उन्होंने काठमांडू और दूसरे शहरों के रास्तों से बाधाएँ हटानी शुरु कर दी थीं.

उल्लेखनीय है कि तीन सप्ताह पहले सात विपक्षी दलों के गठबंधन ने राजशाही के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरु किया था.

इस आंदोलन को माओवादी विद्रोहियों ने अपना समर्थन दिया था.

धीरे-धीरे ये आंदोलन तेज़ होता जा रहा था और इसमें जन-भागीदारी बढ़ती जा रही थी.

आख़िर 24 अप्रैल को राजा ज्ञानेंद्र ने आंदोलन के सामने झुकते हुए संसद को बहाल करने की घोषणा की थी.

पहले तो माओवादियों के नेता प्रचंड ने राजा पर अविश्वास जताते हुए उनकी घोषणा पर विश्वास करने से इंकार कर दिया था.

बीबीसी के काठमांडू संवाददाता के अनुसार राजधानी और दूसरे शहरों में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है.

हालांकि बुधवार को एक सैनिक शिविर के बाहर प्रदर्शनकारियों पर सैनिकों की गोलीबारी में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी और 25 अन्य घायल हो गए थे.

यह घटना दक्षिण-पूर्वी नेपाल में बेलबरी में हुई थी जहाँ क़रीब दो हज़ार लोग सैनिक शिविर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.

प्रदर्शनकारी कथित रूप से सैनिकों के बलात्कार का शिकार बनी एक महिला की मौत को लेकर ग़ुस्से में थे.