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मंगलवार, 25 अप्रैल, 2006 को 09:17 GMT तक के समाचार

'विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले का मतलब युद्ध नहीं'

श्रीलंका में सेना ने तमिल विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े पर बमबारी की है. श्रीलंका के कोलंबो शहर में सेना मुख्यालय पर आत्मघाती हमले के बाद यह कार्रवाई की गई है.

श्रीलंका सरकार ने कहा है कि विद्रोहियों के ठिकाने पर हमले का मतलब युद्ध नहीं है और सरकार अब भी शांति चाहती है.

टेलीवीज़न पर दिए गए राष्ट्र के नाम संदेश में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा कि वे हिंसा के आगे घुटने नहीं टेकेगें.

श्रीलंका में युद्धविराम की निगरानी करने वाले दल और तमिल विद्रोहियों ने देश के पूर्वी इलाक़े में सैनिक कार्रवाई की पुष्टि की. हमलों में श्रीलंकाई नौसेना की भागीदारी की भी ख़बरें हैं.

'स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है...'

मंगलवार को इससे पहले कोलंबो में सेना के मुख्यालय में एक आत्मघाती बम धमाका हुआ जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और सेना प्रमुख सरथ फ़ोनसेको समेत कई लोग घायल हो गए.

सेना के एक प्रवक्ता के अनुसार "सेना के अस्पताल के पास सेना प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल सरथ फ़ोनसेका की गाड़ी को निशाना बनाकर धमाका किया गया."

कोलंबो के पुलिस प्रमुख चंद्रा फ़र्नैंडो ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "सेना के कमांडर के पाँच अंगरक्षक जो मोटर साइकिल पर सवार थे, घटनास्थल पर ही मारे गए."

हमले में इनके अलावा तीन अन्य लोग भी मारे गए.

लेफ़्टिनेंट जनरल सरथ फ़ोनसेका को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

लेफ़टेनेन्ट जनरल सरथ फ़ोनसेका को पिछले साल नवंबर में सेना का प्रमुख बनाया गया था.

महिला हमलावर

सेना के प्रवक्ता के अनुसार हमलावर एक महिला थी. इससे पहले तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के कई आत्मघाती हमलों को महिलाओं ने अंजाम दिया है.

लेकिन फ़िलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार कोलंबो में सेना का मुख्यालय सबसे ज़्यादा सुरक्षा वाला क्षेत्र माना जाता है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार हमलावर ने ऐसा आभास दिया कि वो गर्भवती है और इसी तरह से वह उस अत्यधिक सुरक्षा वाले क्षेत्र में दाख़िल हुईं.

हाल में तमिल विद्रोहियों के श्रीलंका शांति प्रक्रिया से अलग हो जाने के बाद श्रीलंका में हिंसक घटनाएँ बढ़ गई हैं.

पर्यवेक्षक अब चार साल से चले आ रहे संघर्षविराम और श्रीलंका शांति प्रक्रिया के भविष्य के बारे में ख़ासे चिंतित हैं.