मंगलवार, 25 अप्रैल, 2006 को 03:20 GMT तक के समाचार
नेपाल में संसद बहाली की घोषणा के बाद विपक्षी पार्टियों ने नए प्रधानमंत्री के रूप में गिरिजा प्रसाद कोइराला का नाम प्रस्तावित किया है.
संसद बहाली की राजा ज्ञानेंद्र की घोषणा के बाद सात विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ने पिछले तीन सप्ताह से चले आ रहे विरोध प्रदर्शनों को बंद करने का फ़ैसला किया था.
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के संसद बहाल करने की माँग मान लेने के बाद विपक्षी नेताओं ने अब मंगलवार को आयोजित 'विरोध रैली' को 'विजय रैली' के रूप में आयोजित करने की घोषणा की है.
बीबीसी संवाददाता सुनील रामन ने काठमांडू से जानकारी दी कि राजा ज्ञानेंद्र की घोषणा के तुरंत बाद हज़ारों लोग खुशी में सड़कों पर उतर आए. राजधानी काठमांडू में लोग नारे लगा रहे थे,'' यह लोगों की जीत है, लोकतंत्र की जीत है.''
उनका कहना था कि लोग धरने प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों की गोलियों का निशाना बने लोगों के पोस्टर अपने गले में लटकाए हुए हैं.
साथ ही पिछले कुछ दिनों से बंद बाज़ार एक बार फिर खुल रहे हैं और उनमें लोगों की चहलपहल दिखाई दे रही है.
ग़ौरतलब है कि नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सरकारी टीवी पर संसद को फिर से बहाल करने की घोषणा की है. राष्ट्र के नाम संदेश में उन्होंने कहा कि शुक्रवार से संसद की बैठक फिर से हो सकेगी.
ये वही संसद होगी जिसे चार साल पहले मई 2002 में भंग कर दिया गया था. शुक्रवार को संसद की इस बैठक में संविधान सभा के विषय में भी चर्चा होगी.
माँग मानी
देश में पिछले तीन हफ्तों से लोकतंत्र बहाली की मांग लेकर लोग उग्र प्रदर्शन कर रहे थे और कर्फ्यू के बावजूद हर दिन हज़ारों लोग इन प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे थे.
इन प्रदर्शनों में सेना की गोलियों से 14 लोगों की मौत भी हुई. नरेश ज्ञानेंद्र ने अपने संबोधन में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना भी प्रकट की.
नेपाल के सात विपक्षी दलों की मांगों में से यह एक प्रमुख मांग थी कि संसद को बहाल किया जाए.
अमरीकी ने भी राज्ञा ज्ञानेंद्र की इस घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि वो अब सत्ता में अपनी भूमिका से हटने पर विचार करेंगे.
विपक्षी दल संविधान की समीक्षा की भी मांग कर रहे हैं क्योंकि फिलहाल संविधान के तहत राजा को सरकार और सेना के संबंध में बहुत सारे अधिकार मिले हुए हैं.
इससे पहले शनिवार को नेपाल नरेश ने अंतरिम सरकार का गठन करने और अंतरिम प्रधानमंत्री चुनने का प्रस्ताव रखा था जिसे विपक्षी दलों ने ठुकरा दिया था और आंदोलन तेज़ कर दिया था.
रैली, धरने और प्रदर्शन
रविवार को राजधानी काठमांडू में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुईं थीं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियाँ चलाईं और आँसू गैस छोड़ी जिससे 35 लोग घायल हो गए.
रविवार को हज़ारों प्रदर्शनकारी काठमांडू में कर्फ़्यू की परवाह न करते हुए पुलिस के नाकेबंदी को पार कर शहर के बीच पहुँचने की कोशिश करते रहे.
सुरक्षा बलों का कहना था कि उन्हें आदेश दिए गए हैं कि प्रदर्शनकारियों को महल की ओर जाने से रोकें.
नेपाल नरेश ने फरवरी, 2005 में सत्ता अपने हाथ में ले ली थी और कहा था कि माओवादी हिंसा पर क़ाबू पाने के लिए ऐसा करना ज़रुरी था.
राजनीतिक दलों ने राजा के फ़ैसले का विरोध किया था जिसके बाद कई नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया था.